Budget 2024 : नेशनल सेविंग्स स्कीम्स लोगों को बचत के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से शुरू की गई थीं। ये स्कीमें सरकार की तरफ से चलाई जाती हैं। इसलिए इन्हें रिस्क-फ्री माना जाता है। कई सेविंग्स स्कीमों में निवेश करने पर टैक्स में छूट मिलती हैं। इन स्कीमों के जरिए सरकार को भी आम लोगों से पैसे उधार लेने की सुविधा मिलती है। इन स्कीमों के प्रबंधन की जिम्मेदारी बैंकों और पोस्ट ऑफिस पर होती हैं। इन स्कीमों में होने वाला निवेश यूनियन बजट में सरकार के रेवेन्यू रिसीट का हिस्सा होता है। यूनियन बजट 2024 पेश होने से पहले आइए स्माल सेविंग्स स्कीमों के बारे में विस्तार से जानते हैं। हम यह भी समझने की कोशिश करेंगे कि सरकार इन स्कीमों के जरिए किस तरह से लोगों से पैसे उधार लेती है।
हर तिमाही इंटरेस्ट रेट्स की समीक्षा होती है
सरकार ने 2016 में नेशनल सेविंग्स स्कीम्स के लिए डायनेमिक इंटरेस्ट रेट की व्यवस्था शुरू की थी। इसका मतलब है कि इन स्कीमों के इंटरेस्ट रेट्स को फाइनेंशियल मार्केट्स के इंटरेस्ट रेट्स से लिंक्ड कर दिया गया था। सेविंग्स स्कीम्स के इंटरेस्ट रेट्स की हर तिमाही समीक्षा होती है। मार्केट के इंटरेस्ट रेट्स को ध्यान में रख इन्हें बढ़ाया जा घटाया जा सकता है। जब मार्केट्स में इंटरेस्ट रेट्स ज्यादा होते हैं तो सेविंग्स स्कीम के इंटरेस्ट रेट्स भी बढ़ जाते हैं। जब मार्केट में इंटरेस्ट रेट्स कम होते हैं तो इन स्कीम के सेविंग्स रेट्स भी घट जाते हैं।
1999 में हुई थी NSSF की शुरुआत
नेशनल सेविंग्स स्कीम्स में आने वाले पैसे को नेशनल स्मॉल सेविंग फंड (NSSF) में रखा जाता है। इसका नियंत्रण फाइनेंस मिनिस्ट्री के पास होता है। एनएसएसएफ की शुरुआत 1999 में एक पब्लिक अकाउंट के रूप में हुई थी। सेविंग्स स्कीम में जब कोई इनवेस्टर्स पैसे डिपॉजिट करता है तो वह पैसा एनएसएसफंड में आता है। जब कोई निवेशक स्कीम से पैसे निकालता है तो यह पैसा एनएसएसएफ से निकल जाता है। इस फंड में जो पैसा रहता है उसका निवेश केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की सिक्योरिटीज में किया जाता है।
सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट्स की तीन कैटेगरी
नेशनल सेविंग्स स्कीम के तहत स्मॉल सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट्स को मुख्य रूप से तीन कैटेगरी में बांटा जा सकता है।
इनमें पहला है पोस्ट डिपॉजिट्स। इनमें सेविंग्स अकाउंट्स, रेकरिंग डिपॉजिट्स, फिक्स्ड डिपॉजिट्स और मंथली इनकम स्कीम शामिल हैं।
नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट्स (NSC) और किसान विकास पत्र (KVP) जैसी स्कीमें इस कैटेगरी के तहत आती हैं।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम और ऐसी दूसरी स्कीम्स इस कैटेगरी में आती हैं।
नेशनल सेविंग्स स्कीम की खासियतें
स्मॉल सेविंग्स स्कीम को पूरी तरह से सुरक्षित माना जाता है। इनमें निवेश करने पर निवेशकों को रिटर्न की गांरटी होती है। सरकार मार्केट्स के इंटरेस्ट रेट्स को ध्यान में रख इन स्कीमों के इंटरेस्ट रेट्स में बदलाव करती है।
इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी और दूसरे प्रावधानों के तहत नेशनल सेविंग्स स्कीम में निवेश करने पर डिडक्शन मिलता है। इन स्कीमों में जमा पैसे के आधार पर बैंक लोन भी देते हैं।