यूनियन बजट पेश होने में कुछ हफ्ते बचे हैं। इस बजट से अलग-अलग वर्गों को काफी उम्मीदें हैं। सैलरीड टैक्सपेयर्स को भी उम्मीद है कि यूनियन बजट में उनके लिए बड़े ऐलान हो सकते हैं। इसकी वजह यह है कि सैलरीड टैक्सपेयर्स को इस साल 1 फरवरी को पेश बजट में कुछ नहीं मिला था। बजट से पहले प्रमुख उद्योग चैबर्स सहित कई एक्सपर्ट्स ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को इस बार सैलरीड क्लास को इनकम टैक्स में राहत देने की सलाह दी है।
सैलरीड टैक्सपेयर्स (Salaried Taxpayers) को उम्मीद है कि वित्तमंत्री इस बार बजट (Budget 2024) में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80 के तहत निवेश की लिमिट बढ़ा सकती हैं। 2014 से इसे सेक्शन के तहत निवेश की लिमिट 1.5 लाख रुपये बनी हुई है। अगर इसे बढ़ाकर सालाना 2 लाख रुपये कर दी जाती है तो नौकरी करने वाले लोगों को काफी राहत मिलेगी। सेक्शन 80सी के तहत करीब एक दर्जन इनवेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट्स आते हैं। इनमें पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि, म्यूचुअल फंड की टैक्स स्कीम और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी शामिल हैं।
वित्तमंत्री यूनियन बजट में सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ा सकती हैं। अभी नौकरी करने वाले लोगों को हर साल 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर सकती है। पिछले दो-तीन साल में महंगाई बहुत बढ़ गई है। इससे नौकरी करने वाले लोगों के हाथ में पैसे नहीं बच रहे हैं। स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने से उन्हें राहत मिल सकती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को हाउसिंग लोन पर डिडक्शन बढ़ाना चाहिए। अभी सेक्शन 24(बी) के तहत होम लोन के इंटरेस्ट पर एक वित्त वर्ष में 2 लाख रुपये तक का डिडक्शन मिलता है। सैलरीड टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि सरकार इसे बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर सकती है। पिछले सालों में घरों की कीमतें काफी बढ़ी हैं। लेकिन, इंटरेस्ट पर डिडक्शन नहीं बढ़ाया गया है।
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हेल्थ इंश्योरेंस पर टैक्स बेनेफिट
कोविड की महामारी के बाद से हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम बहुत बढ़ गया है। लेकिन, सेक्शन 80डी के तहत हेल्थ इंश्योरेंस पर मिलने वाले डिडक्शन में पिछले कई सालों से कोई वृद्धि नहीं की गई है। सैलरीड क्लास की दलील है कि सरकार को हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन बढ़ाना चाहिए। इससे सैलरीड क्लास को काफी राहत मिलेगी।