बायजूज के फाउंडर बायजू रवीद्रन अमेरिकी बैंकरप्सी कोर्ट के डिफॉल्ट जजमेंट के खिलाफ अपील करेंगे। उन्होंने 22 नवंबर को इस बारे में बताया। कोर्ट ने अल्फा से जुड़े एक विवाद में बायजू को 1.07 अरब डॉलर चुकाने का आदेश दिया था। अल्फा बायजूज की अमेरिकी फाइनेंस इकाई थी। अमेरिकी कोर्ट ने रवींद्रन पर अल्फा के फंड के बारे में जानकारी छुपाने का आरोप लगाया था।
कोर्ट के डिफॉल्ट जजमेंट का मतलब
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कोर्ट में हाजिर नहीं होने और उसके आदेशों का पालन नहीं करने पर कोर्ट ने डिफॉल्ट जजमेंट दिया है। कोर्ट डिफॉल्ट जजमेंट तब देता है, जब कोई पार्टी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में हाजिर नहीं होती है या कोर्ट के ऑर्डर्स की अनदेखी करती है। ऐसी स्थिति में कोर्ट के पास बगैर सुनवाई मामले में फैसला देने का अधिकार होता है।
रवींद्रन ने आरोपों को खारिज किया
रवींद्रन ने 22 नवंबर को पेरिस से जारी प्रेस रिलीज में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया। उन्होंने डिफॉल्ट जजमेंट और इससे जुड़े मामलों में अपील करने की बात कही। उन्होंने कहा कि डिफॉल्ट जजमेंट बहुत जल्दबाजी में दिया गया। उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। रिलीज में यह भी कहा गया है कि रवींद्रन को लीगल काउंसल रखने का पर्याप्त समय नहीं मिला।
जीएलएएस ने क्लेम वापस ले लिया था
रिलीज में कहा गया है कि कोर्ट का फैसला पहले आए कंटेम्प्ट ऑर्डर का नतीजा है। इस रिलीज में GLAS Trust पर डेलावेयर कोर्ट और पब्लिक को भ्रमित करने का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि कोर्ट ने मॉनेटरी जजमेंट इश्यू किया, जबकि GLAS ने सितंबर 2025 में डैमेज के अपने क्लेम को वापस ले लिया था। इसमें यह भी कहा गया है कि GLAS Trust ने गलत तरीके से यह क्लेम किया था कि उसके पास 53.3 करोड़ डॉलर के इस्तेमाल का जानकारी नहीं है।
फाउंडर्स ने अपने फायदे के लिए नहीं किए फंड का इस्तेमाल
रिलीज में यह भी कहा गया है कि इस पैसे का इस्तेमाल रवींद्रन या बायजूज के फाउंडर्स ने अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए नहीं किए बल्कि थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड (TLPL) के फायदे के लिए किए। बयान में कहा गया है कि रवींद्रन और दूसरे फाउंडर्स यूएस फेडरल क्लेम्स का जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं। इस क्लेम के 2.5 अरब डॉलर से कम का होने का अनुमान नहीं है। अगर सेटलमेंट नहीं होता है तो क्लेम 2025 के अंत तक फाइल किया जा सकता है।