साइरस मिस्त्री (Cyrus Mistry) कुछ साल टाटा ग्रुप (Tata Group) के चेयरमैन रहे। इस दौरान उन्होंने कंज्यूमर को लेकर इस समूह की रणनीति में बदलाव के लिए कई कदम उठाए। उन्होंने कंज्यूमर पर फोकस बढ़ाने की पॉलिसी अपनाई। उनका जोर कंज्यूमर की जरूरतें बेहतर तरीके से समझने और उनकी शिकायतें दूर करने पर रहा।
इस बारे में टाटा संस ग्रुप की एग्जिक्यूटिव काउंसिल के सदस्य हरीश भट्ट ने 2015 में एक इंटरव्यू में कहा था कि मिस्त्री के नेतृत्व में टाटा समूह ने कंज्यूमर पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। मिस्त्री के दिमाग में कंज्यूमर सबसे ऊपर है।
मिस्त्री ने टाटा ग्रुप की कंपनियों के सीईओ को कंज्यूमर के दिमाग को समझने और पढ़ने की सलाह दी थी। कंज्यूमर साइकोलॉजिस्ट Kit Yarrow ने अपनी किताब में इसका जिक्र किया है। इस किताब में कंज्यूमर की साइकोलॉजी और उसमें आए बदलाव के बारे में बताया गया है।
दरअसल, लंबे समय तक टाटा ग्रुप का फोकस बिजनेस-टू-कंज्यूमर की जगह बिजनेस-टू-बिजनेस पर था। तब इंडस्ट्री के बी-टू-बी पर फोकस आम बात थी। लेकिन, समय बदलने के साथ कंज्यूमर पर फोकस बढ़ाना जरूरी हो गया। मिस्त्री ने टाटा संस की बागडोर संभालते ही इस बात को समझ ली थी।
टाटा ग्रुप की कई कंपनियों का कारोबार सीधे कंज्यूमर से जुड़ा है। इनमें टाटा कंज्यूमर्स, टाटा मोटर्स, टाटा पावर, टाइटन, इंडियन होटल्स जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इनमें टाइटन सहित कई कंपनियों का प्रदर्शन पिछले कुछ सालों में बहुत अच्छा रहा है। इस समूह की कंपनी टीएसएस देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी है।
सायरस मिस्त्री का 4 सितंबर को एक सड़क हादसे में निधन हो गया। उनकी मौत की खबर ने लोगों को स्तब्ध कर दिया। उनकी उम्र सिर्फ 54 साल थी। इसी साल जून में उनके पिता और शापोरजी पालोनजी ग्रुप के पूर्व प्रमुख शापोरजी पालोनजी का 93 साल की उम्र में निधन हो गया था।