दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट (SpiceJet) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) अजय सिंह को निर्देश दिया है कि वह 10 अगस्त तक कलानिधि मारन को 100 करोड़ रुपये का भुगतान करें। साथ ही कोर्ट ने मौखिक रूप से चेतावनी दी कि अगर यह भुगतान नहीं किया गया तो अदालत को कंपनी का पिछली तिमाही का मुनाफा जब्त करना पड़ सकता है। स्पाइसजेट के CMD अजय सिंह 24 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस योगेश खन्ना के सामने पेश हुए। अदालत के आदेश का पालन नहीं करने के मामले में उन्हें तलब किया गया था। इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
अदालत ने यह आदेश सन ग्रुप (Sun Group) के चेयरमैन कलानिधि मारन के उस आवेदन के सिलसिले में दिया है, जिसमें उन्होंने अपने पक्ष में हुए आर्बिट्रेशन के फैसले को लागू करवाने की मांग की थी। मारन ने अपने आवेदन में कहा था कि स्पाइसजेट को साल 2020 में ही अपनी एसेट्स और लाइबिलिटीज के बारे में हलफनामा देने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने अब तक ऐसा नहीं किया है। इसके बाद हाई कोर्ट ने 24 जुलाई को अजय सिंह को अदालत में पेश होने का निर्देश जारी किया था। मारन के मुताबिक, स्पाइसजेट पर उनका 393 करोड़ रुपये बकाया है। मारन ने 9 अगस्त की सुनवाई में अपनी बकाया राशि के भुगतान के लिए स्पाइसजेट का 50 पर्सेंट रोजाना रेवेन्यू जब्त करने की भी मांग की थी। इस सिलसिले में अदालत ने नोटिस भी जारी किया था।
विवाद की मूल वजह आर्बिट्रेशन का फैसला है, जिसे दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने 31 जुलाई को सही ठहराया था। इसे दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 7 जुलाई को कहा कि आर्बिट्रेशन का फैसला लागू करने योग्य है, क्योंकि स्पाइसजेट ने मारन को भुगतान के लिए जो समयसीमा फरवरी में तय की थी, उसने उसका पालन नहीं किया।
एक आर्बिट्रेशन पैनल ने जुलाई 2018 में स्पाइसजेट को निर्देश दिया था कि वांरट इश्यू नहीं करने के मामले में वह मारन को ब्याज समेत 579 करोड़ रुपये और ब्याज वापस लौटाए। स्पाइसजेट को 350 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी देने और 250 करोड़ रुपये कैश जमा करने का निर्देश दिया गया था। इसके खिलाफ स्पाइसजेट ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।