कर्ज में डूबे उद्योगपति अनिल अंबानी (Anil Ambani) की कंपनी रिलायंस कैपिटल (Reliance Capital) को खरीदने के लिए सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी नीलामी से बाहर हो गई है। पीरामल एंटरप्राइजेज और कॉस्मी फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Piramal Enterprises-Comea Financial Holdings) ने मिलकर 5231 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी, जो कि अब खरीदरी की रेस से बाहर हो गई है। अब खरीदारी की रेस में तीन कंपनियां हैं, जिसमें हिंदुजा (Hinduja), टोरेंट (Torrent) और ओकट्री (Oaktree) शामिल हैं। बता दें कि रिलायंस कैपिटल इनसॉल्वेंसी प्रोसेस (insolvancy process) से गुजर रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, नीलामी के नियमों में बदलाव के चलते पीरामल एंटरप्राइजेज-कॉस्मी फाइनेंशियल होल्डिंग्स ने इससे पीछे हटने का फैसला किया है। लेंडर्स ने ई-नीलामी के लिए बेस प्राइस को 5231 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 6500 करोड़ रुपये कर दिया था। इसके अलवा, नीलामी की तारीख को 19 दिसंबर के बजाय 22 दिसंबर और 23 दिसंबर कर दिया गया था। माना जा रहा है कि लेंडर्स के इस फैसले से बोली लगाने वाली कंपनियों को झटका लगा था, जिसके चलते पीरामल एंटरप्राइजेज और कॉस्मी फाइनेंशियल होल्डिंग्स ने खरीदारी की रेस से पीछे हटने का निर्णय लिया है।
इनसॉल्वेंसी प्रोसेस से गुजर रही है कंपनी
बता दें कि रिलायंस कैपिटल को 24,000 करोड़ रुपये के बैंक बकाए के भुगतान में चूक के बाद पिछले साल नवंबर में डेट रिजॉल्यूशन के लिए भेजा गया था। ई-नीलामी का निर्णय जीवन बीमा निगम और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा लिया गया था जिन्होंने फर्म के लिक्विडेशन के खिलाफ मतदान किया था। इन दोनों की लेनदारों की समिति में 35 फीसदी हिस्सेदारी है। डफ एंड फेल्प्स ने रिलायंस कैपिटल की लिक्विडेशन वैल्यू 12,500 करोड़ रुपये और RBSA एडवाइजर्स ने 13,200 करोड़ रुपये आंकी थी, जो प्राप्त बोलियों से कहीं अधिक थी।