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चीन के निवेश वाली विदेशी कंपनियां, बिना सरकारी मंजूरी भारत में लगा सकेंगी पैसे, लेकिन पूरी करनी होगी यह शर्त

FDI News: चीन की होल्डिंग वाली विदेशी कंपनियों को भारत में ऑटोमैटिक रूट से निवेश की मंजूरी मिल चुकी है लेकिन एक बड़ी शर्त पूरी होनी चाहिए। नए नियम 1 मई से प्रभावी हो चुके हैं। जानिए चीन या हॉन्गकॉन्ग की शेयरहोल्डिंग वाली कंपनियों को भारत में बिना सरकार की मंजूरी निवेश के लिए कौन-सी शर्त पूरी करनी जरूरी है और पहले क्या नियम था

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड May 03, 2026 पर 7:58 AM
चीन के निवेश वाली विदेशी कंपनियां, बिना सरकारी मंजूरी भारत में लगा सकेंगी पैसे, लेकिन पूरी करनी होगी यह शर्त
अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक भारत में जितना एफडीआई इक्विटी निवेश आया, उसमें चीन की हिस्सेदारी मात्र 0.32% ($251 करोड़) रही, और वह 23वें स्थान पर है।

FDI News: इस महीने की शुरुआत यानी 1 मई से उन विदेशी कंपनियों को, जिनमें अधिकतम 10% हिस्सेदारी चीन की है, उन्हें ऑटोमैटिक रूट के तहत भारत में निवेश करने की मंजूरी मिल गई है। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को FEMA के तहत किए गए बदलावों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यूनियन कैबिनेट ने इसे मार्च में मंजूरी दी थी और अब इसका नोटिफिकेशन आया है। DPIIT के प्रेस नोट 3 में बदलावों के तहत अधिकतम 10% चीन या हांगकांग की होल्डिंग वाली विदेशी कंपनियां अब भारत में उन सेक्टर्स में निवेश कर सकेंगी, जहां ऑटोमैटिक रूट के जरिए एफडीआई की मंजूरी मिली हुई है। हालांकि एफडीआई नियमों में यह ढील चीन या हांगकांग में या भारतीय सीमा से लगे देशों में रजिस्टर्ड एंटिटीज पर लागू नहीं होगी। हालांकि ध्यान दें कि आरबीआई के नियमों के तहत रिपोर्टिंग की जरूरत बनी रहेगी।

पहले क्या था नियम?

भारत के साथ चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान की सीमा लगती है। नियमों में बदलाव से पहले भारत की सीमा से लगे देशों के किसी भी शेयरहोल्डर के पास किसी विदेशी कंपनी का सिर्फ एक शेयर भी हो तो उस कंपनी को भारत में निवेश से पहले अनिवार्य रूप से सरकारी मंजूरी लेनी होती थी। हालांकि अब ये प्रतिबंध सिर्फ बेनेफिशियल ओनर्स पर लागू होंगे।

क्या है बेनेफेशियस ओनर्स?

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