इंश्योरेंस सेक्टर में 100% विदेशी निवेश को मंजूरी, LIC के लिए अलग रहेंगे नियम

सरकार ने इंश्योरेंस सेक्टर में 100 प्रतिशत FDI को मंजूरी दे दी है, जिससे विदेशी निवेश बढ़ेगा। हालांकि LIC के लिए सीमा 20 प्रतिशत रहेगी। नए नियमों से प्रतिस्पर्धा बढ़ने और प्रीमियम घटने की उम्मीद जताई जा रही है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड May 02, 2026 पर 10:08 PM
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सरकार ने साफ किया है कि बीमा सेक्टर में विदेशी निवेश इंश्योरेंस एक्ट, 1938 के तहत होगा।

सरकार ने शनिवार, 2 मई को एक बड़ा फैसला लेते हुए इंश्योरेंस सेक्टर में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश (FDI) को ऑटोमैटिक रूट के तहत मंजूरी दे दी है। इसका सीधा मतलब है कि अब विदेशी निवेशकों के लिए भारत के इंश्योरेंस सेक्टर में निवेश करना पहले के मुकाबले आसान हो जाएगा और उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी।

LIC के लिए अलग नियम

नई व्यवस्था के तहत इंश्योरेंस कंपनियों और इंटरमीडियरीज, जैसे ब्रोकर्स में 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश ऑटोमैटिक रूट से किया जा सकेगा। लेकिन सरकारी कंपनी Life Insurance Corporation of India (LIC) के लिए यह सीमा 20 प्रतिशत ही रखी गई है। यह बदलाव फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट (नॉन-डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स) (सेकंड अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 के जरिए किया गया है।


चीन-हांगकांग के लिए रूल

संशोधन के मुताबिक, जिन विदेशी कंपनियों में चीन या हांगकांग की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है, वे अब भारत में उन सेक्टर्स में निवेश कर सकेंगी जहां ऑटोमैटिक रूट के तहत FDI की अनुमति है, बशर्ते वे सेक्टर से जुड़ी शर्तों का पालन करें।

हालांकि, यह छूट उन कंपनियों को नहीं मिलेगी जो सीधे तौर पर चीन, हांगकांग या भारत से जमीन सीमा साझा करने वाले देशों में रजिस्टर्ड हैं।

पहले क्या नियम थे, अब क्या बदला

पहले नियम यह था कि अगर किसी विदेशी कंपनी में इन सीमावर्ती देशों के शेयरहोल्डर की एक भी हिस्सेदारी होती थी, तो उसे भारत में निवेश के लिए सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती थी।

अब यह पाबंदी सिर्फ 'बेनेफिशियल ओनर' यानी असली मालिक पर लागू होगी। यानी निवेश का आकलन इस आधार पर होगा कि असल कंट्रोल किसके पास है।

IRDAI की मंजूरी जरूरी रहेगी

सरकार ने साफ किया है कि इस सेक्टर में विदेशी निवेश इंश्योरेंस एक्ट, 1938 के तहत होगा। साथ ही, जिन कंपनियों को FDI मिलेगा, उन्हें इंश्योरेंस से जुड़ा कारोबार करने के लिए Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) से जरूरी लाइसेंस या मंजूरी लेनी होगी।

LIC में विदेशी निवेश पर अलग नियम लागू रहेंगे। इसमें Life Insurance Corporation of India एक्ट, 1956 और इंश्योरेंस एक्ट, 1938 के प्रावधान लागू होंगे, जैसा कि कानून में पहले से तय है।

DPIIT ने प्रेस नोट में क्या कहा

प्रेस नोट 1 (2026 सीरीज) में Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) ने बताया कि घरेलू इंश्योरेंस कंपनियों में विदेशी निवेश की अनुमति होगी। इसमें पोर्टफोलियो निवेश भी शामिल रहेगा।

यह निवेश ऑटोमैटिक रूट से किया जा सकेगा। हालांकि, इसके लिए Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) की जांच और मंजूरी जरूरी होगी।

74% से 100% तक कैसे पहुंची सीमा

दरअसल, दिसंबर 2025 में संसद ने इंश्योरेंस सेक्टर में FDI की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने वाला बिल पास किया था। इसका मकसद इंश्योरेंस की पहुंच बढ़ाना, प्रीमियम कम करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

'सबका बीमा, सबकी रक्षा (संशोधन) इंश्योरेंस लॉज बिल, 2025' संसद के दोनों सदनों से पास हुआ था। विपक्ष के कई सुझाव खारिज कर दिए गए थे। जैसे बिल को आगे जांच के लिए समिति के पास भेजना।

सरकार की दलील क्या थी

बिल पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि इन बदलावों से विदेशी कंपनियां ज्यादा पूंजी ला सकेंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि इंश्योरेंस सेक्टर को खोलने से देश में बीमा की पहुंच बढ़ी है और इसमें अभी और बढ़ोतरी की गुंजाइश है। 100 प्रतिशत FDI से ज्यादा कंपनियां भारत में आएंगी, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और प्रीमियम कम हो सकते हैं।

अब कानून बन चुका है

राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह बिल कानून बन गया। इसके बाद फरवरी 2026 में DPIIT ने इंश्योरेंस सेक्टर में 100 प्रतिशत FDI लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी।

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