सैमसंग (Samsung) और श्रीपेरंबदूर कारखाने में वर्कर्स के बीच की तनातनी एक बार फिर जोर पकड़ने वाली है। इसकी वजह होगी सस्पेंड किए गए कर्मचारियों को अब तक बहाल न किया जाना। इस साल मार्च में सैमसंग ने तमिलनाडु स्थित श्रीपेरंबदूर कारखाने में महीने भर चली हड़ताल को खत्म करने के लिए प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को बहाल करने पर सहमति जताई थी लेकिन यह भी स्पष्ट किया था कि सस्पेंड किए गए कर्मचारियों पर अभी भी अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
सस्पेंड किए गए 25 कर्मचारियों की अभी तक बहाली नहीं हुई है। इसलिए अब सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) नए सिरे से कार्रवाई कर रहा है। CITU 17 जुलाई को सुबह 10 बजे से विरोध प्रदर्शन करने वाला है। इस विरोध को सैमसंग इंडिया वर्कर्स यूनियन (SIWU) का सपोर्ट है। यूनियन ने सैमसंग पर उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना कर्मचारियों को बर्खास्त करके श्रम अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
5 फरवरी, 2025 को शुरू हुई हड़ताल में सैमसंग के 1,000 से अधिक कर्मचारी शामिल थे। उन्होंने यूनियन मेंबर्स के सस्पेंशन का विरोध किया था। कंपनी के श्रीपेरंबदूर प्लांट में लगभग 1,800 लोग काम करते हैं। इस कारखाने में कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बनते हैं।
पूर्व सांसद और पूर्व विधायक भी बन सकते हैं विरोध का हिस्सा
CITU की ओर से जारी एक प्रोटेस्ट पैंफलेट में लिखा है, "सैमसंग मैनेजमेंट, 25 ट्रेड यूनियन अधिकारियों की बर्खास्तगी के आदेश वापस ले! अवैध वेतन कटौती वापस ले! जिला प्रशासन, भारतीय कानूनों का उल्लंघन करने के लिए सैमसंग मैनेजमेंट के खिलाफ हस्तक्षेप करे!" पूर्व सांसद टी.के. रंगराजन और पूर्व विधायक ए. सुंदररासन सहित CITU के सीनियर लीडर्स भी इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा हो सकते हैं।
सैमसंग ने इस साल फरवरी में जारी एक बयान में कहा था कि अनधिकृत सभाओं, सहकर्मियों को धमकाने और अतिक्रमण जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल कर्मचारियों पर, कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, फिर चाहे वे किसी भी यूनियन से जुड़े हों। कंपनी ने सस्पेंड किए गए कर्मचारियों को लेकर कहा था कि संबंधित कर्मचारियों ने कंपनी की पॉलिसी का उल्लंघन किया है और उन्हें अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया गया है। औपचारिक जांच के बाद उन पर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।