दिवालिया हो चुकी एयरलाइन गो फर्स्ट (Go First) के अधिग्रहण के लिए आई बोलियां आज 23 फरवरी से खोली जाएंगी। एयरलाइन को कर्ज देने वाले लेंडर्स अपने पैसों की वसूली के लिए खरीदार की तलाश कर रहे हैं। गो फर्स्ट के लेंडर्स की कमिटी आज बोलियों की समीक्षा के लिए बैठक कर रही है। सूत्रों ने हमारे सहयोगी CNBC-TV 18 को बताया कि बैठक के दौरान लेंडर्स और IRP बोली को खोलेंगे। CNBC-TV 18 ने पिछले हफ्ते एक रिपोर्ट में बताया था कि स्पाइसजेट के सीएमडी अजय सिंह और बिजी बी एयरवेज (ईजमायट्रिप के सीईओ निशांत पिट्टी के स्वामित्व वाली कंपनी) ने संयुक्त रूप से गो फर्स्ट एयरलाइन को खरीदने के लिए 16 फरवरी को बोली जमा कराई थी।
CNBC-TV18 के सूत्रों के अनुसार, गो फर्स्ट एयरलाइन के लिए बोली लगाने वालों को भरोसा है कि हवाई इंजन बनाने वाली कंपनी प्रैट एंड व्हिटनी (P&W) से जीते गए 30 करोड़ डॉलर के ऑर्बिट्रल मुआवजे को एयरलाइन हासिल करने में सक्षम होगी। इसके एक संभावित तरीका यह है कि ऑर्बिट्रल मुआवजे की वसूली के लिए किसी तीसरे पक्ष को बेच दिया जाए, जो नकदी संकट से जूझ रही गो फर्स्ट को तत्काल धन तक पहुंच मुहैया करेगा।
ऐसा लगता है कि बोलीदाताओं न केवल कंपनी की जमीनों के मॉनेटाइजेशन की योजना बनाई है, बल्कि वे उन 72 एयरबस विमान स्लॉट को भी बेचने की जना बना रहे हैं जो फिलहाल गो फर्स्ट के पास दूसरी एयरलाइनों के हैं।
अजय सिंह और निशांत पिट्टी के कंसोर्टियम के अलावा स्काईवन ने भी गो फर्स्ट के अधिग्रहण के लिए बोली लगाई है। शारजाह मुख्यालय वाली स्काई वन मुख्य रूप से चार्टर्ड हेलीकॉप्टर और कार्गो सेवाओं का संचालन करती है। इन सभी बोलियों को अब ड्यू डिलीजेंस की प्रक्रिया से गुजरना होगा, जो मार्च की दूसरी छमाही में समाप्त होने की उम्मीद है।
गो फर्स्ट ने करीब 10 महीने पहले खुद से दिवालिया याचिका दाखिल की थी। तभी से कंपनी की उड़ान सेवाएं ठप हैं। लेनदारों की समिति और रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल अब एयरलाइन के लिए किसी अन्य खरीदार की तलाश कर रहे हैं। अब तक, वे सफल नहीं हुए हैं, और विजेता बोली पाने का तीसरा प्रयास जारी है।