Wadia Group जितना जल्द हो सके GoFirst की हवाई सेवाएं फिर से शुरू करने के लिए फंड जुटाने की कोशिश कर रहा है। उसने बैंक और दूसरी संस्थाओं से 225 करोड़ रुपये कर्ज लेने के लिए बातचीत शुरू की है। मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी। इस एयलाइन को कर्ज देने वाले बैंकों में से एक ने बताया कि गोफर्स्ट ने सेवाएं शुरू करने के लिए कर्ज मांगा है। कंपनी 225 करोड़ रुपये का नया कर्ज चाहती है। इनसॉल्वेंट कंपनी अपनी सेवाएं जारी रखने के लिए IRP (Interim Resolution Professional) के जरिए कर्ज ले सकती है।
बैंक NCLT के फ्रेमवर्क के तहत दे सकते हैं कर्ज
बैंकों ने बताया है कि चूंकि NCLT में कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत इनसॉल्वेंसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है इसलिए कर्ज देने वाले बैंक गोफर्स्ट की मांग पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, एक बैंक ने कहा कि बैंक सिर्फ NCLT के फ्रेमवर्क के तहत कर्ज देने की कोशिश करेंगे। इससे पहले खबर आई थी कि बैंकों का कहना है कि जब तक रिजॉल्यूशन प्रोसेस पूरा नहीं हो जाता, वे गोफर्स्ट को लोन नहीं देंगे।
एयरलाइन ने सेक्शन 10 के तहत फाइल किया है अप्लिकेशन
इस मामले से जुड़े एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने कहा कि बैंकों के रुख में यह बदलाव तब आया है जब गोफर्स्ट ने दोबारा सेवाएं शुरू करने के लिए एंप्लॉयीज को सैलरी देने और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों एवं एयरपोर्ट्स को कर्ज चुकाने की कीशिशें शुरू की हैं। GoFirst ने सेक्शन 7 और 9 की जगह सेक्शन 10 के तहत बैंकरप्सी के लिए याचिका दी है। सेक्शन 10 में यह प्रावधान है कि कर्ज लेने वाली कोई कंपनी खुद की इनसॉल्वेंसी के लिए प्रक्रिया शुरू कर सकती है। सेक्शन 7 और 9 के तहत बैंक याचिका दाखिल करते हैं, जिसमे कर्ज लेने वाली कंपनी के खिलाफ NCLT में शिकायत की जाती है।
इन बैंकों ने दिए हैं बड़े कर्ज
गोफर्स्ट की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, Bank of Baroda, Central Bank of India, Deutsche Bank और IDBI Bank ने गोफर्स्ट को 6,521 करोड़ रुपये कर्ज दिए हैं। सबसे ज्यादा 1,987 करोड़ रुपये का कर्ज सेंट्रल बैंक ने दिया है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने 1,430 करोड़ रुपये कर्ज दिया है। डोएचे बैंक ने 1,320 करोड़ रुपये कर्ज दिया है। IDBI Bank ने 58 करोड़ रुपये का लोन दिया है। Acuite Ratings and Research ने 19 जनवरी को अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी थी।
10 मई को दाखिल हुई थी इनसॉल्वेंसी की याचिका
इस एयरलाइंस ने 10 मई को इनसॉल्वेंसी की याचिका दाखिल की थी। इसने अपनी सभी हवाई सेवाएं भी बंद करने का ऐलान किया था। NCLT ने कंपनी की याचिका स्वीकार कर ली है। उसने इसे बैंकरप्सी प्रोटेक्शन दिया है और लेजर्स को अपने विमान वापस लेने की इजाजत नहीं दी है। अपनी याचिका में गोफर्स्ट ने अपनी मुश्किलों के लिए Pratt & Whitney को जिम्मेदार बताया है। उसने कहा है कि इस कंपनी ने सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) का फैसला मानने से इनकार कर दिया। एसआईएसी ने एयरलाइंस के पक्ष में फैसला सुनाया था।