इस काम के लिए Tesla को मिल सकती है रियायत, सरकार कर रही विचार

Tesla Cars: दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला (Tesla) लंबे समय से भारत में एंट्री की कोशिशें कर रही हैं। अब तक इस पर पटरी नहीं बैठ पा रही है। हालांकि अब एक मुद्दे पर टेस्ला और भारत सरकार के बीच बातचीत कुछ आगे बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। टेस्ला को कुछ बेनेफिट्स देने पर विचार किया जा रहा है। जानिए किस मामले में टेस्ला को बेनेफिट्स मिल सकता है और सरकार इस पर क्यों विचार कर रही

अपडेटेड Sep 28, 2023 पर 10:55 AM
Tesla Cars News: टेस्ला भारत में कुछ खास कंपोनेंट्स के लिए इनोवेशन एंड डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग हब सेटअप करना चाहती है।

Tesla Cars: इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी टेस्ला (Tesla) भारत में कुछ कंपोनेंट्स की टेस्टिंग करना चाहती है और सभी गाड़ियों के लिए टेस्टिंग ट्रैक सेट अप करना चाहती है। इसके लिए यह भारत सरकार से कुछ रियायतों की उम्मीद कर रही है जिस पर सरकार भी विचार कर रही है। मनीकंट्रोल को यह जानकारी एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने दी है। जानकारी के मुताबिक सरकार को लगता है कि देश में कॉन्सेप्ट इंडस्ट्री लाने से फायाद होगा। हालांकि अधिकारी के मुताबिक अभी इस मामले में बातचीत की काफी गुंजाइश है। इस मामले में कोई भी फैसला संबंधित मंत्रालय लेंगे जिनमें हैवी इंडस्ट्रीज, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज के मिनिस्ट्री शामिल हैं।

Tesla यहां क्यों करना चाहती है टेस्टिंग

जानकारी के मुताबिक टेस्ला भारत में कुछ खास कंपोनेंट्स के लिए इनोवेशन एंड डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग हब सेटअप करना चाहती है। अधिकारी का कहना है कि भारत में दुनिया भर में सबसे अधिक वैरायटी की सड़के हैं तो अगर टेस्ला यहां डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग करती है तो वह अपनी कारों को दुनिया भर में कहीं भी उतार सकती है। डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग ऐसा तरीका है जिसमें कंपोनेंट या मैटेरियल को नष्ट किया जाता है ताकि यह जाना जा सके कि किस स्थिति में यह फेल हो जाएगी। इसके लिए अलग-अलग तरीके आजमाए जाते हैं ताकि यह पूरी तरह से नष्ट हो सके। इसके बाद इसकी फ्लेक्सिबिलिटी और स्ट्रेंथ का आकलन कर यह समझा जाता है कि दबाव में यह कैसा परफॉर्म करेगा।

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भारत को क्या हो सकता है फायदा

टेस्टिंग ट्रैक और डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग में काफी लागत आती है और यह बहुत स्किल वाला काम है। हालांकि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के लिहाज से यह देश के ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। अभी देश में मध्य प्रदेश में नेशनल ऑटोमोटिव टेस्ट ट्रैक है जिसमें जिनमें हाई-स्पीड ट्रैक, मल्टी-फ्रिक्शन ब्रेकिंग ट्रैक, ग्रेडिएंट ट्रैक, थकान ट्रैक, ग्रेवल और ऑफ-रोड ट्रैक और कम्फर्ट ट्रैक शामिल हैं। यह मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है।

भारत में कार बनाने पर बात कहां तक बढ़ी?

टेस्ला भारत में एक मैनुफैक्चरिंग प्लांट लगाने पर भी विचार कर रही है। हालांकि इसकी गाड़ी कहां तक खिसकी इसे लेकर अधिकारी का कहना है कि इसमें सरकार को सबसे बड़ी चिंता लेबर और एंप्लॉयमेंट को लेकर है क्योंकि हाई-टेक इलेक्ट्रिक कार एसेंबली लाइन ज्यादातर ऑटोमैटिक तरीके से काम करती हैं। इलेक्ट्रिक कारों के लिए टेस्ला को टैक्स बेनेफिट्स की अटकलों पर उन्होंने दोहराया कि सरकार इस पर विचार नहीं कर रही है।

उन्होंने सीधे कहा कि आम लोगों या नई जेनेरेशन के लोगों के इस्तेमाल वाली इलेक्ट्रिक वेईकल्स पर टैक्स बेनेफिट्स मिलेगा लेकिन हाई-एंड ईवी के लिए नहीं। उनका कहना है कि सरकार EVs पर पर्याप्त टैक्स बेनेफिट्स दे ही रही है तो अब और देने की जरूरत ही क्या है। टेस्ला 40,000 डॉलर से अधिक कीमत वाली हाई-एंड इलेक्ट्रिक कारों का निर्माण करती है।

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