GST Registration : कॉरपोरेट जगत और इंडस्ट्री को GST रजिस्ट्रेशन के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार ने वन नेशन-वन जीएसटी रजिस्ट्रेशन लागू करने को लेकर वर्किग ग्रुप का गठन किया है। .ये वर्किंग ग्रुप 30 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। यह पूरी खबर देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के आलोक प्रियदर्शी ने कहा कि सरकार ने वन नेशन-वन GST रजिस्ट्रेशन की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। देश के सभी टैक्स ज्यूडिक्शन का सेंट्रलाईज्ड एडमिनिस्ट्रेशन होगा।
11 सदस्यीय वर्किंग ग्रुप का गठन
आलोक प्रियदर्शी ने आगे कहा कि काफी लंबे समय से यह बात चल रही थी कि एक देश में एक जीएसटी रजिस्ट्रेशन से ही देश भर में कारोबार करने की मंजूरी मिल जानी चाहिए थी। लेकिन अभी दिक्कत ये थी देश भर में बिजनेस करने के लिए कारोबारियों को हर राज्य में अलग-अलग जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता था। इसकी वजह यही थी की टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन में आपस में बंटवारा है। सेंटर अलग से जीएसटी वसूलता है। वहीं, स्टेट अलग से जीएसटी वसूलते हैं। यह काफी पेचीदा स्थिति थी। इसकी वजह से कारोबारियों को काफी लंबे समय से परेशानी हो रही थी। लिहाजा अब इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने, खास तौर पर कहें तो CBIC (Central Board of Indirect Taxes and Custom) ने एक 11 सदस्यीय वर्किंग ग्रुप का गठन किया है। इस ग्रुप का काम होगा कि वह इस बात की जांच करे कि किस तरीके से जीएसटी रजिस्ट्रेशन का एक सेंट्रलाइज्ड एडमिनिस्ट्रेशन हो सकता है।
वर्किंग ग्रुप 30 दिनों के अंदर सरकार को देगा अपनी रिपोर्ट
इसके लिए जो उपाय सुझाए गए हैं उसमें कहा गया है कि एक ही पैन के साथ मल्टिपल जीएसटी रेजिस्ट्रेशन किए जा सकते हैं। अगर किसी कारोबारी के पास अलग-अलग जीएसटी रजिस्ट्रेशन हैं तो उनको अगर उसके पैन के साथ जोड़ दिया जाए तो इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। यह वर्किंग ग्रुप अब इस मुद्दे पर और क्या हो सकता है, विदेशों में इसके लिए क्या किया जाता है, ऐसे तामाम मामलों पर स्टडी करेगा। यह ग्रुप इन सब बातों पर 30 दिनों को अंदर सरकार को अपनी रिपोर्ट देगा।
सरकार देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ाने के लक्ष्य को लेकर चल रही है। इसके तहत वह कारोबारियों को जीएसटी की पेचीदगियों से निजात दिलाना चाहती है। इसी के लिए यह वर्किंग ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप की सिफारिशों को सरकार के सामने पेश करने के बाद जीएसटी काउंसिल में रखा जाएगा। अगर इन सिफारिशों पर केंद्र और राज्यों में सहमति बन जाती है तो कारोबारियों को बहुत बड़ी राहत मिल जाएगी।