हल्दीराम ने बेची 10% हिस्सेदारी; कौन है खरीदार, कितनी लगी वैल्यूएशन?

हल्दीराम ने सिंगापुर की निवेश फर्म Temasek को 10% हिस्सेदारी बेच दी, जिससे कंपनी का कुल वैल्यूएशन 10 अरब डॉलर हो गया। यह फंड बिजनेस विस्तार में लगेगा। कंपनी 5-6% और हिस्सेदारी बेचने की योजना भी बना रही है।

अपडेटेड Mar 30, 2025 पर 2:43 PM
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हल्दीराम का हिस्सेदारी बिक्री से मिले फंड का इस्तेमाल विस्तार के लिए करेगी।

Haldiram Temasek Deal: देश की सबसे मशहूर स्नैक्स और मिठाई कंपनी में शुमार हल्दीराम ने सिंगापुर की निवेश फर्म Temasek के साथ एक बड़ी डील की है। इसके तहत हल्दीराम के मौजूदा शेयरधारकों ने अपनी 10% हिस्सेदारी बेच दी है। इससे कंपनी का कुल वैल्यूएशन 10 अरब डॉलर हो गया है।

PwC ने एक प्रेस रिलीज में यह जानकारी दी। इसमें हिस्सेदारी का जिक्र नहीं किया गया है। हालांकि, बिजनेस स्टैंडर्ड ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सौदा इसी रकम पर तय हुआ है।

हल्दीराम ने क्यों बेची है हिस्सेदारी?


हल्दीराम का हिस्सेदारी बिक्री से मिले फंड का इस्तेमाल विस्तार के लिए करेगी। प्रमोटर्स को इससे कोई सीधा फायदा नहीं होगा। हल्दीराम पहले से ही देशभर में अपने बिजनेस को बढ़ाने में जुटा है। वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। Temasek के साथ हालिया डील भी इसी का हिस्सा है।

अगले दौर की डील पर भी चर्चा

इस डील को फाइनल करने में PwC ने हल्दीराम के लिए वित्तीय सलाहकार और Khaitan & Co ने कानूनी सलाहकार की भूमिका निभाई। सौदा पूरी तरह से रेगुलेटरी मंजूरी मिलने के बाद फाइनल होगा।

इसी बीच खबर ये भी है कि हल्दीराम अपनी 5-6% और हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहा है। इससे उसे 500 मिलियन डॉलर तक की अतिरिक्त रकम मिल सकती है। सूत्रों ने बताया कि अल्फा वेव ग्लोबल जल्द ही लगभग 10 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन पर हल्दीराम में लगभग 5-6 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने के लिए समझौता कर सकती है।

भारत में अल्फा वेव ग्लोबल ने स्विगी, लेंसकार्ट, ड्रीम 11, चायोस, बिरयानी बाय किलो, ओला और पॉलिसी बाजार जैसी कंपनियों पर दांव लगाया है। इसके विदेशी पोर्टफोलियो में डोमिनोज पिज्जा, स्पेस एक्स और उबर जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।

 

हल्दीराम ने डील पर क्या कहा?

हल्दीराम की ओर से जारी बयान में कहा गया, "हम Temasek को अपने साथ जोड़कर बेहद खुश हैं। उनका अनुभव हमें तेजी से बढ़ने में मदद करेगा।" वहीं, PwC इंडिया के चेयरमैन संजय कृष्णन ने कहा कि ये भारत में अब तक का सबसे बड़ी कंज्यमूर प्राइवेट इक्विटी डील है। इससे साबित होता है कि भारतीय कंपनियां अब ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बना रही हैं।

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