भारत और ब्राजील ने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) में चीनी से जुड़े व्यापार विवाद को आपस में सुलझाने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। इस विवाद को सुलझाने के लिए दक्षिण अमेरिकी देश भारत के साथ एथनॉल प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी शेयर कर सकता है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। यह एथनॉल प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी में भी लीडर है। ब्राजील दुनिया में गन्ना और एथनॉल का सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है।
अधिकारी ने कहा, "विवाद को सुलझाने के हमारे प्रयासों के तहत कुछ दौर की बातचीत हुई है। हमने यहां अंतर-मंत्रालयी बैठकें भी की हैं। ब्राजील ने कहा है कि वह हमारे साथ एथनॉल प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी साझा करेगा। यह एक सकारात्मक बात है।" जिनेवा स्थित मल्टी लेटरल बॉडी में विवाद को सुलझाने के लिए भारत को म्यूचुअली एग्रीड सॉल्यूशन (MAS) के तहत अपनी ओर से भी कुछ ऑफर करना होगा। WTO नियमों के अनुसार वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के किसी भी सदस्य को अगर लगता है कि कोई व्यापार उपाय डब्ल्यूटीओ नियमों के खिलाफ है, तो वह जिनेवा में मामला दायर कर सकता है।
भारत ने अमेरिका से जुड़े विवादों को भी निपटाया
हाल ही में भारत और अमेरिका ने छह ट्रेड विवादों को निपटाया है और सातवें मामले को भी समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की है। इस समाधान के तहत जहां भारत ने सेब और अखरोट जैसे आठ अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर ‘जवाबी’ शुल्क हटा दिया है, वहीं अमेरिका अतिरिक्त शुल्क लगाए बिना भारतीय इस्पात और एल्युमीनियम प्रोडक्ट्स को बाजार तक पहुंच प्रदान कर रहा है। अधिकारी ने कहा कि भारत डब्ल्यूटीओ में चीनी विवाद में अन्य शिकायतों के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपना रहा है।
आयात पर निर्भरता कम करने में मिलेगी मदद
एथनॉल का इस्तेमाल व्हीकल फ्यूल में मिलाने के लिए किया जाता है। गन्ने के साथ-साथ टूटे हुए चावल और अन्य कृषि उपज से निकाले गए एथनॉल के उपयोग से दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कच्चे तेल उपभोक्ता व आयातक देश को आयात पर अपनी निर्भरता को कम करने में मदद मिलेगी। भारत फिलहाल अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 फीसदी आयात करता है। साथ ही एथनॉल कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाता है। भारत ने 2025 तक पेट्रोल में 20 फीसदी एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है।