India Budget 2024 : 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में सरकार डिसइनवेस्टमेंट का टारगेट घटा सकती है। इसकी वजह यह है कि इस वित्त वर्ष में डिसइनवेस्टमेंट टारगेट से बहुत कम है। वित्तमत्री Nirmala Sitharaman 1 फरवरी को अंतरिम बजट (Interim Budget 2024) पेश करेंगी। इसमें वह अगले वित्त वर्ष में डिसइनवेस्टमेंट के टारगेट के बारे में बताएगी। 1 फरवरी, 2023 को अपने बजट भाषण में निर्मला सीतारमण ने डिसइनवेस्टमेंट के लिए 51,000 करोड़ रुपये के टारगेट का ऐलान किया था। लेकिन, इस मोर्चे पर सरकार का प्रोग्रेस काफी सुस्त है। अब तक डिसइनवेस्टमेंट से सरकार 10,000 करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा पैसा जुटा सकी है। अभी किसी कंपनी के निजीकरण का प्लान नहीं है। उधर, कई ब्लूचिप सरकारी कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी के करीब पहुंच गई है। ऐसे में कंपनी में माइनॉरिटी स्टेक बेचे जाने की सीमित गुंजाइश है।
बजट 2024 में डिसइनवेस्टमेंट का टारगेट कम रहने की उम्मीद
उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार डिसइनवेस्टमेंट का कम टारगेट तय करेगी। यह 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। इसका ऐलान वित्तमंत्री 1 फरवरी को करेंगी। सरकार वित्त वर्ष 2022-23 में भी विनिवेश के लिए तय टारगेट को हासिल नहीं कर पाई थी। उसने 65,000 करोड़ रुपये का टारगेट तय किया था। लेकिन, वह 35,293 करोड़ रुपये ही हासिल कर पाई थी।
बजट 2024 के बाद ही विनिवेश पर बढ़ेगा फोकस
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। इसलिए चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सरकार विनिवेश पर फोकस बढ़ाएगी। डिसइनवेस्टमेंट के जरिए सरकार कंपनियों में आंशिक या बड़ी हिस्सेदारी बेचती है। सरकार कुछ कंपनियों को लिस्ट कराती है। इसमें ओएफएस के जरिए वह कंपनी में अपनी कुछ हिस्सेदारी आम निवेशकों को बेच देती है। LIC को सरकार ने 2022 में सूचीबद्ध कराया था।
बजट 2024 में विनिवेश के टारगेट का होगा ऐलान
वित्तवर्ष 2023-24 के डिसइनवेस्टमेंट के टारगेट को हासिल करने के लिए NMDC Steel और IDBI Bank में हिस्सेदारी बेचना बहुत अहम था। लेकिन दोनों कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने में कुछ बाधाएं हैं। गृह मंत्री के इस बयान के बाद एनएमडीसी के नारगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण का प्लान रुक गया कि छत्तीसगढ़ के प्लांट को निजी कंपनियों को नहीं बेचा जाएगा। IDBI के मामले में एक्सप्रेसन ऑफ इंटरेस्ट पर RBI के फिट एंड प्रॉपर क्लीन चिट का इंतजार है। DIPAM के सेक्रेटरी तुहिन कांत पांडेय ने भी कहा था कि इस वित्त वर्ष में IDBI Bank में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद नहीं है।