भारत ने रेयर अर्थ मैग्नेट्स (Rare Earth Minerals) के मामले में चीन पर अपनी निर्भरता घटाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत अब ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, ब्राजील और चिली जैसे देशों से इन महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए बातचीत कर रहा है। फिलहाल चीन का रेयर अर्थ मैग्नेट्स के मामले में दबदबा है। चीन इस समय ग्लोबल स्तर पर करीब 60% रेयर अर्थ मैग्नेट्स का उत्पादन करता है और लगभग 90% कच्चे माल की प्रोसेसिंग भी वहीं होती है। इन मैग्नेट्स का हैवी इंडस्ट्रीज, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रोबोटिक्स, बैटरियों और डिफेंस इक्विपमेंट्स जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। ऐसे में अगर चीन कभी भी सप्लाई रोकता है तो भारत समेत पूरी दुनिया की इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत घरेलू स्तर पर इस कमी को पूरा करने के लिए 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन' (NCMM) के तहत उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रहा है। साथ ही सर्कुलर इकोनॉमी के जरिए रीसाइक्लिंग पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि घरेलू स्तर पर उपलब्धता बढ़ाई जा सके। साथ ही सरकारी और निजी कंपनियों के जरिए देश में ही रेयर अर्थ मैग्नेट्स के उत्पादन की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
एक अधिकारी के मुताबिक, "चीन और अफ्रीका के बीच व्यापार संबंधों को देखते हुए भारत का ऑस्ट्रेलिया और लैटिन अमेरिका की ओर रुख करना जरूरी हो गया है। खासकर चिली से लिथियम का आयात बढ़ाना भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम है क्योंकि भारत ने 2030 तक देश में बिकने वाली नई गाड़ियों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का हिस्सा 50% तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।" इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बनाने के लिए रेयर अर्थ मैग्नेट्स का काफी इस्तेमाल होता है।
इसी कड़ी में खनन मंत्री जी किशन रेड्डी और भारी उद्योग मामलों के मंत्री एचडी कुमारस्वामी के बीच मंगलवार 17 जून को एक अहम बैठक भी हुई। इस बैठक में परमाणु ऊर्जा, स्टील, कॉमर्स और भारी उद्योग मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक में खनन से लेकर रिफाइनिंग और अंतिम उत्पाद तक की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
भारत के पास तीसरा सबसे बड़ा भंडार
हालांकि चीन के पास 4.4 करोड़ रेयर अर्थ एलीमेंट्स का सबसे बड़ा भंडार है, लेकिन अमेरिका के जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार भारत के पास भी 69 लाख टन भंडार है, जो दुनिया में तीसरे सबसे बड़ा है। ब्राजील इस सूची में दूसरे स्थान पर है। वहीं EY की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास दुनिया के एक-तिहाई सैंड मिनरल डिपॉजिट्स हैं, जिनसे REEs (रेयर अर्थ एलीमेंट्स) निकाले जा सकते हैं।
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