India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही ट्रेड डील की बातचीत आखिरकार सोमवार देर रात फाइनल हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने इस ट्रेड डील पर मुहर लगा दी है। इसे भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।
ट्रंप ने इस डील को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाएं शून्य तक ले जाने का भरोसा दिया है। इससे आगे चलकर भारतीय बाजार में कई अमेरिकी सामान सस्ते हो सकते हैं। वहीं यह डील भारतीय कंपनियों के लिए भी फायदेमंद मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इससे ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी और दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई मजबूती मिलेगी।
भारत में क्या-क्या हो सकता है सस्ता?
इसके अलावा टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भी इस डील का असर दिख सकता है। लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और कंपोनेंट्स जैसे उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी घटने से इनके दाम कम हो सकते हैं। साथ ही पैकेज्ड फूड, होम अप्लायंसेज जैसे कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के की कीमतों में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि इनके इंपोर्ट से जुड़ी लागत घटेगी।
भारतीय एक्सपोर्टरों को भी मिलेगा फायदा
यह समझौता केवल आयात तक सीमित नहीं है। भारतीय निर्यातकों के लिए भी इसमें बड़े अवसर छिपे हैं। एनडीटीवी प्रॉफिट की रिसर्च के मुताबिक, टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को अमेरिकी बाजार में टैरिफ में कटौती का सीधा फायदा मिल सकता है, जिससे भारतीय कपड़ों की कीमत वहां कम होगी और मांग बढ़ सकती है।
जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर भी इस डील से ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकता है। इसके अलावा स्टील, केमिकल्स और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे इंडस्ट्रियल सेक्टर को भी बेहतर मार्केट एक्सेस और कम ट्रेड फ्रिक्शन का लाभ मिलने की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे भारत की एक्सपोर्ट क्षमता मजबूत होगी और अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ सकती है।
कौन-से उत्पाद अब भी रहेंगे महंगे
हालांकि सभी सेक्टरों को इस डील से तुरंत राहत नहीं मिलेगी। कुछ अहम इंडस्ट्रियल धातुओं पर अमेरिका की सख्त नीति जारी रहेगी। स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर लागू अमेरिकी सेक्शन 232 के तहत शुल्क अब भी करीब 50 प्रतिशत के आसपास बना रहेगा। इसी तरह कुछ ऑटो कंपोनेंट्स पर भी लगभग 25 प्रतिशत तक टैरिफ जारी रहने की संभावना है, क्योंकि इन सेक्टर्स को टैरिफ में सीमित राहत ही दी गई है।
ट्रेड डील पर क्या कहा गया
भारत-US ट्रेड डील के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने फोन कॉल के बाद कहा कि भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को शून्य तक लाने का भरोसा दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी खुशी जताई कि अब “मेड इन इंडिया” उत्पाद अमेरिकी बाजार में 18 प्रतिशत के कम टैरिफ पर पहुंच सकेंगे।
ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर से अधिक के सामान की खरीद करेगा, जिसमें एनर्जी, टेक्नोलॉजी, कृषि उत्पाद, कोयला और दूसरी कई वस्तुएं शामिल होंगी। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका से पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मात्रा में सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते और गहरे होंगे।
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