दिसंबर में तीन महीने के हाई पर पहुंची महंगाई, जनवरी से बदल जाएगा CPI मापने का फॉर्मूला

दिसंबर में खुदरा महंगाई तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। हालांकि यह अभी भी RBI की निचली सीमा से नीचे है। जनवरी से CPI का नया बेस ईयर लागू होगा, जिससे महंगाई मापने का तरीका बदल जाएगा।

अपडेटेड Jan 12, 2026 पर 4:30 PM
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2025 में औसत महंगाई 2.2 फीसदी रही, जो पिछले 12 सालों में सबसे कम स्तर है।

भारत में महंगाई साल के आखिर में थोड़ी बढ़ती नजर आई है। सरकार की ओर से 12 जनवरी को जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में खुदरा महंगाई 1.33 फीसदी रही, जो नवंबर में 0.7 फीसदी थी। यह पिछले तीन महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है।

RBI की सीमा से नीचे है महंगाई

हालांकि दिसंबर में महंगाई बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद हेडलाइन महंगाई लगातार चौथे महीने RBI की निचली सहनशील सीमा 2 फीसदी से नीचे बनी हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि साल के मध्य के बाद से कीमतों पर दबाव काफी हद तक काबू में रहा है।


पूरे साल की बात करें तो 2025 में औसत महंगाई 2.2 फीसदी रही, जो पिछले 12 सालों में सबसे कम स्तर है।

CPI डेटा के लिहाज से खास है दिसंबर

दिसंबर का महीना महंगाई के आंकड़ों के लिहाज से एक अहम मोड़ भी है। यह 2012 बेस ईयर के तहत जारी होने वाला आखिरी CPI डेटा है। इसके बाद से महंगाई की कैलकुलेशन का तरीका बदल जाएगा।

जनवरी का CPI डेटा 2024 बेस ईयर पर आधारित होगा, जो 12 फरवरी को जारी होगा। इसके साथ ही महंगाई मापने की पूरी सीरीज नए ढांचे में चली जाएगी।

नए बेस ईयर में क्या बदलेगा

नए बेस ईयर के तहत कंजम्पशन बास्केट को अपडेट किया गया है। इसमें पहले से ज्यादा आइटम शामिल किए गए हैं और नॉन-फूड खर्चों को ज्यादा वेटेज दिया गया है।

इस बदलाव का मकसद यह दिखाना है कि आज के समय में लोग सिर्फ खाने-पीने पर ही नहीं, बल्कि सेवाओं और दूसरी जरूरतों पर भी ज्यादा खर्च कर रहे हैं।

मौजूदा CPI में फूड का ज्यादा असर

फिलहाल CPI पर खाद्य वस्तुओं का असर बहुत ज्यादा है। मौजूदा इंडेक्स में फूड आइटम्स का हिस्सा आधे से ज्यादा है। यही वजह है कि सब्जियों, अनाज या दालों की कीमतों में थोड़ी सी तेजी या गिरावट भी हेडलाइन महंगाई को तेजी से ऊपर-नीचे कर देती है, भले ही बाकी चीजों की कीमतें स्थिर हों।

नई CPI सीरीज से क्या फर्क पड़ेगा

नॉन-फूड आइटम्स का वजन बढ़ने से आने वाले समय में महंगाई का आंकड़ा कुल मांग और खर्च की स्थिति को बेहतर तरीके से दिखा सकेगा। इसके साथ ही हेडलाइन महंगाई खाने-पीने की कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से थोड़ा कम प्रभावित होगी।

कुल मिलाकर, नई CPI सीरीज से महंगाई के आंकड़े ज्यादा संतुलित होंगे और अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर को ज्यादा सटीक तरीके से सामने रखेंगे।

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