Jaiprakash Associates Insolvency: जेपी ग्रुप (जयप्रकाश ग्रुप) की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) भारत के सबसे चर्चित कॉर्पोरेट दिवालियापन मामलों में से एक है। इस कंपनी को खरीदने में कई बड़ी भारतीय कंपनियों की दिलचस्पी है।
Jaiprakash Associates Insolvency: जेपी ग्रुप (जयप्रकाश ग्रुप) की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) भारत के सबसे चर्चित कॉर्पोरेट दिवालियापन मामलों में से एक है। इस कंपनी को खरीदने में कई बड़ी भारतीय कंपनियों की दिलचस्पी है।
CNBC-TV18 के मुताबिक, अदाणी ग्रुप, JSW ग्रुप, वेलस्पून, वेदांता ग्रुप, ओबेरॉय रियल्टी और डालमिया भारत सहित 25 से अधिक बड़ी कंपनियां इस कर्ज से लदी कंपनी के अधिग्रहण के लिए इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) दाखिल कर सकती हैं।
EOI जमा करने की आखिरी तारीख मंगलवार (25 मार्च) को समाप्त हो रही है। बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि कुछ और कंपनियां भी इसमें शामिल हो सकती हैं। JAL की एसेट कई सेक्टर में हैं। हालांकि, इसकी कर्ज वाली रकम भी काफी बड़ी है। इससे यह मामला भारत के हालिया इतिहास में सबसे अधिक चर्चित कॉर्पोरेट रिजॉल्यूशन प्रोसेस में से एक बन सकता है।
JAL पर कितना कर्ज है?
जयप्रकाश एसोसिएट्स के कारोबार में रियल एस्टेट, सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग, हॉस्पिटैलिटी और इंजीनियरिंग व कंस्ट्रक्शन शामिल हैं। हालांकि, यह कंपनी गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है और IBC के तहत कुल ₹57,185 करोड़ के दावों का सामना कर रही है।
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्शियम से JAL का कर्ज खरीदने के बाद, नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) इस मामले में सबसे बड़ा दावा करने वाला संस्थान बन गया है।
JAL के कितनी एसेट्स है?
2023-24 में JAL की कुल आय में रियल एस्टेट का योगदान 14% था। इसके तहत प्रमुख प्रोजेक्ट्स में ग्रेटर नोएडा का जयप्रकाश ग्रीन्स, नोएडा का जयप्रकाश ग्रीन्स विशटाउन और जेवर एयरपोर्ट के पास जयप्रकाश इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी शामिल हैं। इसके पास होटल, सीमेंट प्लांट और कुछ पट्टे पर लिए गए चूना पत्थर की खदानें हैं। हालांकि, इसके सभी सीमेंट प्लांट फिलहाल बंद हैं।
हाल ही में, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने फैसला सुनाया कि JAL को एक ही इकाई के रूप में बेचा जाएगा और इसे अलग-अलग बिजनेस यूनिट्स में नहीं बांटा जाएगा। इसका मतलब है कि जो कंपनियां केवल किसी खास एसेट को खरीदने की इच्छुक थीं, वे इस प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पाएंगी।
EOI की डेडलाइन खत्म होते ही यह देखना दिलचस्प होगा कि कितनी कंपनियां अगले चरण में बोली लगाने के लिए आगे आती हैं। फिलहाल, दो दर्जन से अधिक कंपनियां दिलचस्पी दिखा चुकी हैं। लेकिन, अंतिम दौर में कितने खरीदार गंभीर रूप से निवेश के लिए तैयार हैं, इसका पता आने वाले हफ्तों में ही चल पाएगा।
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