पिछला फाइनेंशियल ईयर (FY24) बड़ी आईटी कंपनियों के मुकाबले मध्यम आकार की आईटी कंपनियों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। क्लाइंट्स की तरफ से वेंडर कंसॉलिडेशन डील में कमी आई है, जिसका असर रेवेन्यू ग्रोथ पर पड़ा है। हालांकि, इससे पहले बड़ी आईटी कंपनियों के मुकाबले मिड-साइज आईटी कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा था। लेकिन, साल दर साल आधार पर मिड-साइज आईटी कंपनियों का ग्रोथ रेट साल दर साल आधार पर घटकर आधा रह गया है। पिछले कुछ सालों में क्लाइंट्स ने टेक्नोलॉजी पर अपने खर्च घटाए हैं। इसकी वजह प्रमुख बाजारों में आर्थिक अनिश्चितता की स्थिति है। इसका असर आईटी कंपनियों के रेवेन्यू पर पड़ा है। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में उनका प्रदर्शन कमजोर रहा है।
क्या है वेंडर कंसॉलिडेशन?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि वेंडर कंसॉलिडेशन डील बड़ी आईटी कंपनियां हड़प ले रही हैं। इसका असर मिड-साइज कंपनियों पर पड़ रहा है। मिड साइज कंपनियां क्लाइंट्स को अट्रैक्ट करने के लिए डिस्काउंट ऑफर कर रही हैं। इसका असर उनके मार्जिन पर पड़ा है। वेंडर कंसॉलिडेशन डील का मतलब ऐसी स्थिति से है जब क्लाइंट्स एफिशियंसी बढ़ाने के लिए सप्लायर्स की संख्या घटा देते हैं। इसके चलते अक्सर डील्स बड़ी कंपनियों को मिल जाती हैं, क्योंकि उनके पास डील की प्राइसिंग को लेकर मोलभाव करने की ज्यादा क्षमता होती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बढ़ा है खर्च
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईटी कंपनियां समय के साथ चलने की कोशिश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जेनेरेटिव एआई पर खर्च बढ़ा रही हैं। बड़ी कंपनियों को अतिरिक्त खर्च करने में ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही हैं। लेकिन, छोटी आईटी कंपनियों पर इसका असर पड़ रहा है। बड़ी आईटी कंपनियों से मतलब रेवेन्यू के लिहाज से टॉप 5 आईटी कंपनियों से है। इनमें TCS, HCL Tech, Wipro और Tech Mahindra शामिल हैं। मिड आईटी कंपनियों में LTIMindtree, Persistent Systems, L&T Technology Services, Coforge, और KPIT Technologies शामिल हैं।
वेंडर कंसॉलिडेशन से मिड साइज कंपनियों को नुकसान
एवरेस्ट ग्रुप के पार्टनर युगल जोशी ने कहा कि मिड-साइज कंपनियां प्रमुख क्लाइंट्स पर निर्भर करती हैं। उनके कुल बिजनेस में कुछ क्लाइंट्स की ज्यादा हिस्सेदारी होती है। उन्होंने कहा, "अगर इनमें से किसी क्लाइंट्स के साथ कुछ होता है तो इसका सीधा असर आईटी कंपनी पर पड़ता है।" जब कभी वेंडर कंसॉलिडेशन देखने को मिलता है मिड-साइज आईटी कंपनियों के नुकसान उठाना पड़ता है।
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तय तारीख से पहले ही डील रिन्यू कराने पर बढ़ा फोकस
जोशी ने कहा, "मौजूदा स्थिति में मिड आईटी कंपनियों को अपने क्लाइंट्स के दूसरी कंपनी के पास जाने का डर सता रहा है। ऐसे में वे डील रिन्यूएल तारीख से काफी पहले ही उसे रिन्यू कराने पर जोर दे रही हैं। आप जब कभी ऐसा करते हैं आपको काफी डिस्काउंट ऑफर करना पड़ता है। इसका सीधा असर आपके मार्जिन पर पड़ता है।"