Layfoff News: RBI के झटके से बेहाल ZestMoney में 20% एंप्लॉयीज की छंटनी, अब यहां नौकरी दिलाने की हो रही बात

Layoff News: दिग्गज निवेशक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) के निवेश वाली जेस्टमनी (ZestMoney) के 20 फीसदी एंप्लॉयीज की छंटनी होगी। कुछ हफ्ते पहले इसकी फोनपे (PhonePe) के साथ बातचीत पटरी से उतर गई। ऐसे में खुद को बचाए रखने के लिए जेस्टमनी ने छंटनी की फैसला किया। आरबीआई के इस नियम ने जेस्टमनी की कमर तोड़ दी है जिससे यह संभल नहीं पा रही है

अपडेटेड Apr 07, 2023 पर 1:45 PM
कारोबार को जारी रखने के लिए जेस्टमनी ने करीब 20 फीसदी एंप्लॉयीज को बाहर निकालने का फैसला किया है। 20 फीसदी एंप्लॉयीज का मतलब करीब 100 की नौकरी जाएगी।

Layoff News: दिग्गज निवेशक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) के निवेश वाली जेस्टमनी (ZestMoney) को अब अपने सर्वाइवल के लिए छंटनी का ही रास्ता दिख रहा है। कुछ हफ्ते पहले अपने कारोबार को बेचने के लिए फोनपे (PhonePe) के साथ इसकी बातचीत पटरी से उतर गई। ऐसे में कारोबार को जारी रखने के लिए जेस्टमनी ने करीब 20 फीसदी एंप्लॉयीज को बाहर निकालने का फैसला किया है। 20 फीसदी एंप्लॉयीज का मतलब करीब 100 की नौकरी जाएगी। जेस्टमनी के फाउंडर्स और टॉप लीडरशिप ने 6 अप्रैल को एक बैठक में एंप्लॉयीज को छंटनी के बारे में बता दिया। कंपनी एक महीने की सैलरी के साथ-साथ इंश्योरेंस और मेंटल हेल्थ असिस्टेंस जैसे बाकी बेनेफिट्स सेवेरेंस में देगी। इसमें करीब 450 एंप्लॉयीज हैं।

PhonePe में मिल सकती है नौकरी

छंटनी को लेकर सुगबुगाहट उसी समय शुरू हो गई थी जब जेस्टमनी और फोनपे की बातचीत पटरी से उतर गई। इसकी को-फाउंडर प्रिया शर्मा ने कुछ समय पहले कई स्टार्टअप्स को अपने एंप्लॉयीज को काम देने का आग्रह किया था। इस कारण यह आशंका बनने लगी थी कि इसमें छंटनी होने वाली है। मनीकंट्रोल को सूत्रों को हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक फोनपे भले ही जेस्टमनी को खरीदने से पीछे हट गई हो लेकिन यह इसके करीब 200 एंप्लॉयीज को काम पर रखने के लिए तैयार है। हालांकि अभी तक इसे लेकर कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है।

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ZestMoney और PhonePe के बीच क्यों नहीं हो पाई डील

जेस्टमनी की कमर आरबीआई के एक निर्देश ने तोड़ी है। आरबीआई के निर्देश के मुताबिक नॉन-बैंकिंग इंस्टीट्यूशंस या फिनटेक कंपनियों को वॉलेट्स या प्रीपेड कार्ड्स पर क्रेडिट लाइन्स लोड करने से रोक दिया। इससे बाय नाऊ, पे लेटर सर्विसेज मुहैया कराने वाली जेस्टमनी को तगड़ा झटका लगा। हालांकि फोनपे के को-फाउंडर और सीईओ समीर निगम का कहना है कि इस सौदे में कानूनी रूप से कुछ खामियां यानी ड्यू डिलीजेंस लैप्सेज थी जिसके चलते सौदा नहीं हो पाया।

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छह महीने से फोनपे इस पर काम कर रही थी लेकिन समीर निगम के मुताबिक उसके मानकों पर जेस्टमनी की खरीदारी खरी नहीं उतरी। वहीं जेस्टमनी के एंप्लॉयीज की हायरिंग को लेकर उन्होंने कहा कि अभी इस पर बातचीत चल रही है। पिछले साल वर्ष 2022 में फोनपे ने जेस्टमनी को खरीदने के लिए बातचीत शुरू किया था और यह सौदा करीब 20-30 करोड़ डॉलर का हो सकता था।

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