भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को GST डिमांड नोटिस मिलने का सिलसिला थम नहीं रहा है। 2 जनवरी को कंपनी को महाराष्ट्र टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से 806 करोड़ रुपये का GST डिमांड नोटिस मिला था। अब कंपनी को और तीन राज्यों के टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से GST डिमांड नोटिस मिले हैं। ये 3 राज्य तमिलनाडु, गुजरात और उत्तराखंड हैं। तीनों की ओर से LIC (Life Insurance Corporation of India) से कुल मिलाकर 668 करोड़ रुपये के GST की डिमांड की गई है। इस अमाउंट में ब्याज और जुर्माना भी शामिल है। कंपनी ने इस बारे में शेयर बाजारों को सूचना दे दी है।
LIC ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि कंपनी को तमिलनाडु, उत्तराखंड और गुजरात की GST अथॉरिटीज की ओर से GST, ब्याज और जुर्माना वसूलने के लिए डिमांड ऑर्डर्स प्राप्त हुए हैं। तमिलनाडु की टैक्स अथॉरिटीज की ओर से जारी किए गए ऑर्डर में LIC से 6,634,514,426 रुपये का भुगतान करने को कहा गया है। यह नोटिस वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 के लिए है। टैक्स अथॉरिटी ने सप्लाई पर गलत ITC (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का लाभ उठाने, छूट वाली आपूर्ति के कारण सामान्य ITC को वापस न करने, वैध शुल्क भुगतान दस्तावेजों के बिना गलत ITC का लाभ उठाने; जीएसटीआर-1 में गलत तरीके से नॉन GST सप्लाई के तौर पर घोषित किए गए टर्नओवर पर टैक्स का भुगतान न करने के आरोप लगाए हैं।
इसी तरह, उत्तराखंड की टैक्स अथॉरिटी की ओर से जारी आदेश में LIC को 42,818,506 रुपये देने को कहा गया है। नोटिस वित्त वर्ष 2017-18 के लिए है और अथॉरिटी ने कंपनी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के नॉन रिवर्सल का आरोप लगाया है। गुजरात की टैक्स अथॉरिटी ने LIC से 3,939,168 रुपये की मांग की है। नोटिस वित्त वर्ष 2017-18 के लिए है। टैक्स के कम पेमेंट, जीएसटी नॉन कंप्लायंट वेंडर्स पर आईटीसी का गलत लाभ लेने का आरोप है।
कंपनी इन आदेशों के खिलाफ करेगी अपील
कंपनी ने कहा है कि इन ऑर्डर्स के खिलाफ LIC चेन्नई, देहरादून और अहमदाबाद के कमिशनर (अपील) के समक्ष निर्धारित समयावधि के अंदर याचिका दायर करेगी। LIC ने दावा किया कि इन टैक्स ऑर्डर्स के कारण कंपनी के फाइनेंशियल्स, ऑपरेशंस या अन्य गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
यहां से भी मिल चुके हैं नोटिस
इससे पहले LIC को बिहार के GST प्राधिकरण से 290.50 करोड़ रुपये और तेलंगाना सरकार की ओर से 183 करोड़ रुपये से ज्यादा का GST डिमांड नोटिस मिल चुका है। इसके अलावा तीन आकलन वर्षों 2012-13, 2018-19 और 2019-20 के लिए आयकर विभाग (Income Tax Department) की ओर से कंपनी को 84 करोड़ रुपये जुर्माने का नोटिस भी मिल चुका है।