Snapdeal on Government Radar: मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (MCA) ने दिग्गज ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्नैपडील की जांच शुरू कर दी है। यह जांच कंपनीज एक्ट से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने और नियामकीय उल्लंघन पर हो रही है। मनीकंट्रोल को यह जानकारी एक सरकारी अधिकारी ने दी। जानकारी के मुताबिक रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) ने जब अपनी रिपोर्ट में गड़बड़ियों का खुलासा किया तो इसकी मिनिस्ट्री ने इसकी जांच शुरू कर दी। यह मिनिस्ट्री की उस जांच का बड़ा हिस्सा है, जिसके तहत चाइनीज कंपनियों से निवेश हासिल करने वाली 700 से अधिक कंपनियों की जांच हो रही है। इसमें से कुछ कंपनियों को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के फाउंडिंग्स के आधार पर स्क्रूटनी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारी के मुताबिक जांच में छह महीने तक का समय लग सकता है।
क्या जांच हो रही और कंपनी का क्या कहना है?
अधिकारी ने बताया कि स्नैपडील की जांच कर आरओसी ने शुरुआती जांच रिपोर्ट दाखिल की थी। इसके आधार पर मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स ने और गहराई से जांच के आदेश दिए। इसमें चीन से जो निवेश कंपनी में आया है, उसकी जांच की जाएगी। AceVector Group की वर्ष 2010 में बनी स्नैपडील में चाइनीज कंपनीज का निवेश रहा है। वर्ष 2015 से लेकर वर्ष 2021 तक अलीबाबा के पास इसकी 3 फीसदी हिस्सेदारी थी। AceVector के प्रवक्ता ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा कि मिनिस्ट्री ने मई 2024 में जानकारी मांगी थी और कंपनी ने इसे मुहैया भी करा दिया। प्रवक्ता ने कहा कि AceVector में कोई चाइनीज निवेशक नहीं है। AceVector Limited का नाम पहले स्नैपडील लिमिटेड था और इसकी सबसे बड़ी शेयरहोल्जर सॉफ्टबैंक की कंपनी Starfish I Pte Ltd है जिसके पास 35.4 फीसदी होल्डिंग है।
यूनीकॉमर्स ने अपने आईपीओ ड्राफ्ट में किया था खुलासा
मिनिस्ट्री ने ऑफिस ऑफ रीजनल डायरेक्टर (नॉर्थ रीजन) के जरिए 13 मई को कंपनी, इसके निदेशकों कुणाल बहल और रोहित कुमार बंसल के साथ-साथ मैनेजमेंट के प्रमुख लोगों के लिए कंपनीज एक्ट, 2013 के सेक्शन 206(5) के तहत एक लेटर जारी किया था। इसमें कंपनी के कारोबार, इसके ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल और वर्किंग रिजल्ट्स के बारे में जानकारी मांगी गई थी। इसके अलावा मिनिस्ट्री ने पांच साल के बोर्ड और शेयरहोल्डर्स की बैठक की डिटेल्स भी मांगी है। इसके अलावा आईटीआर, एसेसमेंट्स ऑर्डर्स, सेक्रेटेरियन रिकॉर्ड्स भी मांगे गए हैं। 24 मई को कंपनी जांच में सहयोग के लिए तैयार हो गई। मामला अभी भी चल रहा है और AceVector की प्रमोटेड कंपनी यूनीकॉमर्स ईसॉल्यूशंस ने अपने आईपीओ के ड्राफ्ट में इसकी जानकारी दी थी। यूनीकॉमर्स के शेयरों की घरेलू मार्केट में 13 अगस्त को एंट्री हो चुकी है।