Layoff News: छंटनी का आतंक अभी तक खत्म नहीं हुआ है। ताजा कड़ी में अब मैकिंसी एंड कंपनी (McKinsey & Co.) करीब 360 एंप्लॉयीज को निकाल रही है। कंसल्टिंग कंपनी मैकिंसी ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि इसके सर्विसेज की मांग सुस्त पड़ी है। इस छंटनी का असर कंपनी के दुनिया भर के एंप्लॉयीज पर पड़ेगा। इसके तहत डिजाइन, डेटा इंजीनियरिंग, क्लाउड और सॉफ्टवेयर डिवीजन से एंप्लॉयीज की छुट्टी की जाएगी। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। सूत्र के मुताबिक मैकिंसी में छंटनी के चलते इसके करीब 3 फीसदी एंप्लॉयीज पर असर दिखेगा जिन्हें स्पेशलिस्ट माना जाता है या जो टेक्निकल एक्सपर्ट हैं। अभी कंपनी में ऐसे करीब 12 हजार एंप्लॉयीज हैं।
दुनिया के 130 शहरों में McKinsey के हैं 45 हजार एंप्लॉयीज
सूत्र के मुताबिक छंटनी की प्रक्रिया के तहत कुछ एंप्लॉयीज के पदों को खत्म किया जाएगा। हालांकि इस छंटनी की आंच ट्रेडिशनल कंसल्टैंट्स पर नहीं पड़ेगी। अभी McKinsey के दुनिया भर के 130 शहरों में 45 हजार से अधिक एंप्लॉयीज हैं। मैकिंसी सिर्फ मांग में सुस्ती ही नहीं जूझ रही है बल्कि राजनीतिक दिक्कतों से भी जूझ रही है। इसका काम सऊदी अरब और चीन में भी फैला हुआ है जिसके चलते इसे राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है।
रिकॉर्ड रेवेन्यू के बावजूद कंसल्टैंट्स के परफॉरमेंस से खुश नहीं मैकिंसी
कोरोना महामारी के दौरान कंसल्टिंग इंडस्ट्रीज में तेजी आई और धड़ाधड़ हायरिंग होने लगी। हालांकि फिर अर्न्स्ट एंड यंग (Ernst & Young) और PwC ग्लोबल को हाल ही में छंटनी करनी पड़ी क्योंकि कई क्लाइंट्स ने लॉन्ग टर्म निवेश को थाम लिया। मैकिंसी की बात करें तो पिछले साल इसे 1600 करोड़ डॉलर का रिकॉर्ड रेवेन्यू हासिल हुआ, फिर भी कंपनी ने अपने करीब 3 हजार कंसल्टैंट्स को चेतावनी दी कि उनका काम अच्छा नहीं है और सुधार की जरूरत है। हाल में कंपनी ने कंपनी ने ब्रिटिश एंप्लॉयीज को 9 महीने का वेतन लेकर कंपनी छोड़ने का ऑफर दिया था।