Tata Projects साणंद में तैयार कर रही Micron का सेमीकंडक्टर प्लांट, हजारों करोड़ की है लागत

टाटा प्रॉजेक्ट्स का लक्ष्य आधुनिक निर्माण विधियों और तकनीकों का उपयोग करना है, जिसमें 4D BIM और हाइब्रिड मॉड्यूलर एक्सीलरेटेड कंस्ट्रक्शन के माध्यम से इंटीग्रेटेड EPC डिलीवरी शामिल है। बयान के अनुसार, साणंद फैक्ट्री को ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के LEED गोल्ड मानकों के अनुसार डिजाइन किया जाएगा और इसमें एडवांस्ड वाटर सेविंग टेक्नोलॉजीस को भी इंटीग्रेट किया जाएगा

अपडेटेड Sep 23, 2023 पर 3:20 PM
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यह प्लांट 93 एकड़ में फैला हुआ है।

अमेरिका की चिप निर्माता कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron Technology) ने 23 सितंबर को गुजरात के साणंद इंडस्ट्रियल एरिया में एक सेमीकंडक्टर टेस्टिंग और पैकेजिंग प्लांट का कंस्ट्रक्शन शुरू कर दिया। यह प्लांट 2.75 अरब डॉलर (करीब 22854 करोड़ रुपये) की लागत का है और अभी इसके निर्माण के पहले चरण की शुरुआत के लिए भूमि पूजन किया गया है। माइक्रोन ने प्लांट के निर्माण के लिए टाटा प्रॉजेक्ट्स के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। टाटा प्रॉजेक्ट्स की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि यह प्लांट 93 एकड़ में फैला हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 जून को अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान माइक्रोन के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

बयान में कहा गया है कि यह प्रॉजेक्ट इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत सबसे बड़ा निवेश है। प्लांट का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। पहले चरण में 500,000 वर्ग फुट का प्लान्ड क्लीनरूम स्पेस शामिल होगा और यह 2024 के अंत तक चालू हो जाएगा। टाटा प्रॉजेक्ट्स का लक्ष्य आधुनिक निर्माण विधियों और तकनीकों का उपयोग करना है, जिसमें 4D BIM और हाइब्रिड मॉड्यूलर एक्सीलरेटेड कंस्ट्रक्शन के माध्यम से इंटीग्रेटेड EPC डिलीवरी शामिल है। बयान के अनुसार, साणंद फैक्ट्री को ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के LEED गोल्ड मानकों के अनुसार डिजाइन किया जाएगा और इसमें एडवांस्ड वाटर सेविंग टेक्नोलॉजीस को भी इंटीग्रेट किया जाएगा।

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माइक्रोन करेगी 82.5 करोड़ डॉलर खर्च

प्लांट की कुल लागत में से 82.5 करोड़ डॉलर (लगभग 6,760 करोड़ रुपये) माइक्रोन की ओर से होंगे, जबकि बाकी बची हुई लागत सरकार दो चरणों में वहन करेगी। योजना के तहत, माइक्रोन को केंद्र से प्रॉजेक्ट कॉस्ट के लिए 50 प्रतिशत वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन मिलेगा। माइक्रोन ने कहा है कि उसने अपने मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुकूल कारोबारी माहौल और साणंद इंडस्ट्रियल पार्क (गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन GIDC) में अच्छी तरह से स्थापित टैलेंट पाइपलाइन के कारण गुजरात को चुना।

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