नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने सोमवार 15 मई को लीज पर विमान देने वाली कंपनियों की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें गो फर्स्ट (Go First) की दिवालिया याचिका को स्वीकार करने के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के आदेश को चुनौती दी गई थी। NCLAT ने कहा कि वह 22 मई को इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। इससे पहले कर्ज में डूबी एयरलाइन के अंतरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल्स ने आज सुनवाई के दौरान आरोप लगाया कि लेसर्स ने गो फर्स्ट की ओर से दिवालिया कार्यवाही शुरू करने की योजना के ऐलान के बाद 'टर्मिनेशन लेटर' जारी किए। इन लेटर्स का मकसद इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (IBC) की प्रक्रिया को विफल बनाना है।
