डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियस सर्विसेज के सेक्रेटरी एम नागाराजू ने सरकारी बीमा कंपनियों के विलय से जुड़ी किसी योजना से इनकार किया है। उन्होंने आगे कहा कि एक बार नीतिगत फैसला हो जाने के बाद सरकार इसे जारी कर देगी। उन्होंने ये बातें फर्स्ट रेजिडेंशियल मॉर्गेज-बैक्ड सिक्योरिटीज की लिस्टिंग के मौके पर कही। उन्होंने कहा कि सरकारी बीमा कंपनियों के विलय पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है लेकिन जब कोई नीतिगत फैसला लिया जाएगा तो इसे सामने रखा जाएगा। पिछले हफ्ते कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सरकार चार सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों- न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस को आपस में मिलाने पर विचार कर रही है।
विलय को लेकर क्यों हो रही चर्चा?
सरकार ने अभी तो इससे इनकार कर दिया है कि चार सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के विलय की कोई योजना है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन कंपनियों को मिलाने की योजना इसलिए बन रही है, ताकि प्राइवेट बीमा कंपनियों के साथ भिड़ंत के लिए एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी तैयार हो सके। इस विलय से देश भर में सामान्य बीमा सेवाओं के विस्तार और पहुंच को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सात साल पुराना है विलय का प्रस्ताव
बीमा कंपनियों के विलय का प्रस्ताव वित्त वर्ष 2018 के बजट में रखा गया था। अब माना जा रहा है कि अब इस योजना पर फिर से काम किया जा सकता है। सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने वित्त वर्ष 22 में सचिवों के एक पैनल को यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के निजीकरण की सिफारिश की थी, लेकिन इस पर अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है।