कुछ प्राइवेट बैंकों ने वित्त वर्ष 2025 (वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही) के लिए बिजनेस अपडेट जारी किया है। इसमें मुख्य तौर पर एडवांस और डिपॉजिट की ग्रोथ का ब्यौरा है। हालांकि, यह आंकड़ा सिर्फ कुछ बैंकों ने उपलब्ध कराया है और इससे हम कुछ ट्रेंड समझ सकते हैं और पूरी तस्वीर तभी साफ होगी, जब आने वाले दिनों में तिमाही नतीजों का ऐलान होगा।
दिसंबर 2024 में HDFC बैंक की एडवांस ग्रोथ में सालाना आधार पर 3 पर्सेंट की गिरावट रही। ग्रोथ में सुस्ती में गाइडेंस के हिसाब से है और ऐसा जानबूझकर भी किया जा रहा है, ताकि क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो में सुधार लाया जा सके। तीसरी तिमाही के दौरान HDFC बैंक का सिक्योरिटाइज्ड/असाइंड लोन 21,600 करोड़ रुपये रहा। बाकी प्राइवेट बैंकों मसलन बंधन बैंक, यस बैंक और इंडसइंड बैंक की लोन ग्रोथ में सालाना आधार पर 12 से 15 पर्सेंट की बढ़ोतरी रही। CSB बैंक की ग्रोथ सालाना आधार पर 26 पर्सेंट रही। बैंक की लोन ग्रोथ में तेज बढ़ोतरी की मुख्य वजह गोल्ड लोन में तेजी रही। संबंधित अवधि में CSB बैंक की लोन ग्रोथ में सालाना आधार पर 36 पर्सेंट की ग्रोथ रही।
संबंधित अवधि में HDFC बैंक के लिए डिपॉजिट ग्रोथ थोड़ी बेहतर रही और इस वजह से क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो में मामूली सुधार देखने को मिला।
बैंकिंग सेक्टर में मोटे तौर पर ट्रेंड क्या है?
पिछले दो साल के दौरान बैंकिंग सेक्टर में 14-16 पर्सेंट की तेजी रहने के बाद क्रेडिट ग्रोथ घटकर 10.5 पर्सेंट पर पहुंच गई। लोन ग्रोथ में इस स्लोडाउन की वजह HDFC और HDFC बैंक के मर्जर से पैदा हुआ ऊंचा बेस इफेक्ट है। इसके अलावा, अनसिक्योर्ड लेंडिंग को लेकर रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए कदमों का प्रतिकूल असर भी लोन ग्रोथ पर दिखा है। क्रेडिट डिपॉजिट रेशियो ज्यादा होने की चिंताओं की वजह से लोन ग्रोथ में सुस्ती रही। इसके अलावा, सुस्ती की मुख्य वजह पर्सनल लोन और सर्विसेज सेगमेंट में ग्रोथ का सुस्त होना है।