RBI MPC Meeting December 2024: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक आज 4 दिसंबर से शुरू हो चुकी है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास शुक्रवार 6 दिसंबर को, इस बैठक के नतीजों का ऐलान करेंगे। हालांकि अधिकतर एनालिस्ट्स पहले ही यह अनुमान जता चुके हैं कि RBI इस बैठक में एक बार फिर ब्याज दरों को यथावत बनाए रखने का फैसला कर सकता है। यानी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। आइए समझने की कोशिश करते हैं शेयर मार्केट को इस बैठक से क्या उम्मीदें हैं? RBI के सामने क्या-क्या चुनौतियां हैं? और सबसे जरूरी बात, इसका आपकी जेब पर क्या असर पड़ सकता है?
महंगाई बनी हुई है बड़ी चुनौती
महंगाई इस समय RBI के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। महंगाई को काबू करना आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की पहली प्राथमिकता है। सरकार ने RBI को निर्देश दिया है कि वो कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स आधारित (CPI) खुदरा महंगाई दर को 4% पर बनाकर रहे। इसमें 2 फीसदी तक के उतार-चढ़ाव की इजाजत है। यानी महंगाई दर को 2 से 6% रखने का निर्देश है। लेकिन अभी स्थिति अलग है। अक्टूबर 2024 में महंगाई दर 6.21% दर्ज की गई, जो आरबीआई की टॉलरेंस लिमिट से भी ऊपर है। खासतौर से खाने-पीने से जुड़ी चीजों की महंगाई ने इंफ्लेशन रेट को ऊपर बनाकर कर रखा हुआ है।
ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने का असर देश की आर्थिक ग्रोथ पर दिखने लगा है। हालिया सितंबर तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 5.4% रही। यह पिछले सात तिमाहियों का सबसे निचला स्तर है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या RBI आर्थिक गतिविधियों को तेज करने के लिए कुछ कदम उठाएगा ताकि बाजार में नकदी बढ़ सके?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आरबीआई इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे 6.5% पर स्थिर रख सकता है। हालांकि बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए सीआरआर (CRR) में कटौती या ओपन मार्केट ऑपरेशन्स जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
एक्सपर्ट्स की क्या है राय?
JM Financial का कहना है कि "महंगाई के ऊंचे स्तर के कारण दिसंबर में पॉलिसी दरों में बदलाव नहीं होगा। लेकिन फरवरी 2025 में दर कटौती हो सकती है।" ICRA की चीफ इकॉनमिस्ट अदिति नायर का भी कुछ ऐसा ही मानना है। उन्होंने कहा कि "अगर आने वाले दो महीनों में महंगाई कम होती है, तो फरवरी में दरों में कटौती संभव है।"
वहीं JP Morgan के साजिद चिनॉय कहते हैं कि "फूड सप्लाई के मोर्चे पर झटकों और बार-बार बढ़ती कीमतें RBI के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।" RBI के लिए जटिलता यह है कि पिछले 2-3 सालों में सप्लाई के मोर्चे पर मिले झटकों से इकोनॉमी प्रभावित हुई है। फूड सप्लाई के मोर्चे पर झटकों के चलते फूड इंफ्लेशन ऊंचा बना हुआ है। पिछले 4 सालों से औसत CPI 5.8 प्रतिशत रहा है। इस साल, इसमें कमी आई है, लेकिन यह अभी भी 5 प्रतिशत है।"
आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा?
अगर RBI बाजार में नकदी बढ़ाने के लिए कदम उठाता है, तो इसका मतलब यह होगा कि आपके लिए कर्ज लेना सस्ता हो सकता है। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा, जो होम लोन या बिजनेस लोन लेने की योजना बना रहे हैं। लेकिन अगर महंगाई पर काबू नहीं पाया गया, तो इसका असर आपके रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ेगा। सब्जियों से लेकर पेट्रोल और अन्य चीजें महंगी हो सकती हैं।
डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।