मोबाइल ऐप के जरिए गैरकानूनी तरीके से लोन देने वाली कंपनियों के खिलाफ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के एक वर्किंग ग्रुप ने कड़े नियम बनाने का प्रस्ताव दिया है।
मोबाइल ऐप के जरिए गैरकानूनी तरीके से लोन देने वाली कंपनियों के खिलाफ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के एक वर्किंग ग्रुप ने कड़े नियम बनाने का प्रस्ताव दिया है।
वर्किंग ग्रुप ने इन ऐप के लिए एक नोडल एजेंसी बनाने का प्रस्ताव दिया है, जो इनका वेरिफिकेशन करेगी। प्रस्ताव में कहा गया कि इंडस्ट्री के सभी स्टेकहोल्डर्स से मिलकर एक नोडल एजेंसी बनाई जाए। साथ ही एक सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन (SRO) भी बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें डिजिटल लेडिंग इकोसिस्टम में मौजूद सभी कंपनियां शामिल हो।
वर्किंग ग्रुप ने कहा कि ग्राहकों के हितों की रक्षा सबसे जरूरी है। हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें गैर-कानूनी तरीके से ऐप के जरिए डिजिटल लोन देकर ग्राहकों से भारी ब्याज की वसूली की गई। साथ ही वसूली के कई मामलों को ग्राहकों को अत्याधिक परेशान भी किया गया।
RBI ने गुरुवार को जारी एक प्रेस रिलीज में कहा, "रिपोर्ट में ग्राहक सुरक्षा को बढ़ाने और इनोवेशन को प्रोत्साहन देने के साथ, डिजिटल लोन के पूरे इकोसिस्टम को सुरक्षित और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है।"
बता दें कि रिजर्व बैंक ने जनवरी, 2021 में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल तरीके से लोन दिए जाने को लेकर कार्यकारी निदेशक जयंत कुमार दास की अध्यक्षता में इस वर्किंग ग्रुप का गठन किया था।
वर्किंग ग्रुप ने डिजिटल लोन से जुड़ी गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए अलग से एक कानून बनाने का भी सुझाव दिया है। इसके अलावा कमेटी ने कुछ टेक्नोलॉजी से जुड़े मानक और दूसरे नियम भी तय करने का सुझाव दिया है, जिसका पालन डिजिटल लोन सेगमेंट में उतरने वाली हर कंपनी को करना होगा।
इसके अलावा वर्किंग ग्रुप ने यह भी सुझाव दिया कि है कि किसी भी तरह के लोन राशि को सीधे उधारकर्ता के बैंक खाते में डाला जाए, न कि किसी ऐप के मोबाइल वॉलेट या दूसरे जगहों पर। साथ ही लोन पर ईएमआई को भी बैंक खाते से ही लिया जाए और इसे ऐप पर जमा करने का सिस्टम खत्म हो।
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