यस बैंक दो साल पहले अपने लगभग पतन पर आ गया था, जिसके बाद उसे काफी नाटकीय तरीके से रेस्क्यू किया गया। इसके बाद से यस बैंक ने अब तक लंबा सफर तय कर लिया है। हालांकि निवेशकों के लिए भारतीय प्राइवेट सेक्टर बैंकिंग में विश्वास करना अभी भी थोड़ा मुश्किल हो रहा है। कहावत भी है, 'दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है।'
लीडरशिप में अचानक से बदलाव और बोर्ड-रूम में रेगुलटर की अगुआई में बदलाव जैसे कदमों ने निवेशकों के संदेह को और बढ़ाया है। RBL बैंक अभी जिस नाजुक हालत में उलझा है, वह भी कुछ ऐसा ही है। बैंक के बोर्ड में RBI की तरफ से एडिशनल डायरेक्टर नियुक्त करना और उसके मैनेजिंग डायरेक्टर विश्ववीर आहूजा का अचानक अपना पद छोड़कर अनिश्चित छुट्टी पर चले जाने ने निवेशकों के विश्वास को झकझोर कर रख दिया है।
मुंबई मुख्यालय वाले RBL बैंक ने 26 दिसंबर को मीडिया और निवेशकों के साथ जल्दबाजी में बातचीत कर उनकी चिंताओं को दूर करने की कोशिश की, लेकिन ऐसा लगता है कि इससे कुछ फायदा नहीं हुआ क्योंकि एक दिन बाद सोमवार को बैंक का स्टॉक गिर गया।
कई एनालिस्ट भी बैंक के स्पष्टीकरण से आश्वस्त नहीं हैं। जेफरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Jefferies India Pvt Ltd) के एनालिस्टों ने बताया, "उत्तराधिकार के मुद्दे पर, मैनेजमेंट समयसीमा या संभावित उम्मीदवारों को लेकर सीमित स्पष्टता ही मुहैया कर सका। हालांकि मैनेजमेंट की तरफ से कहा गया है कि एक औपचारिक कमेटी संभावित उम्मीदवारों (आंतरिक और बाहरी) के नाम शॉर्टलिस्ट कर RBI को जमा करेगी। इस कमेटी में बोर्ड के सदस्य भी शामिल रहेंगे।"
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सिक्योरिटीज लिमिटेड (Motilal Oswal Financial Securities Ltd) के एनालिस्ट ने कहा कि बैंक की लीडरशिप स्तर से जुड़ी घटनाओं ने इसके ऑपरेटिंग प्रदर्शन पर भी असर डाला था। यह RBL बैंक कें अंतरिम CEO राजीव आहूजा की तरफ से दोहराए जाने के बावजूद हुआ है कि बैंक अपने विभिन्न मेट्रिक्स में सुधार की राह पर है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सिक्योरिटीज लिमिटेड के एनालिस्टों ने एक नोट में लिखा, "मौजूदा घटनाक्रम ने ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस में आए सुधार को जारी रखने की बैंक की क्षमताओं को लेकर चिंताएं बढ़ाई है। साथ ही दूसरे मीडियम साइज के दूसरे बैंकों पर भी रेगुलेटर की तरफ से इस तरह की कार्रवाई की चिंताओं को भी बढ़ाया है।"
निवेशकों की चिंता को क्यों दूर नहीं कर पा रहा है RBL बैंक?
कोरोना महामारी के बाद से RBL बैंक का ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस कमजोर हुआ है। इसके बीच RBI की तरफ से कार्रवाई ने निवेशकों को और सतर्क कर दिया है। RBL बैंक का स्लिपेज उसके समकक्ष बैंकों के मुकाबले कहीं अधिक है। बैंक का करेंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट (CASA) डिपॉजिट भी उससे समकक्ष बैंकों के मुकाबले कम है।
दूसरी अहम चीज यह है कि बैंक का लोन बुक में अधिक जोखिम वाले क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी 22 पर्सेंट है। इसके अलावा छोटे बिजनेसों को दिए गए लोन का हिस्सा भी अधिक है। महामारी के दौरान सबसे अधिक डिफॉल्ट इन्ही लोन में देखा गया था।
जाहिर है कि RBL बैंक को निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए बैलेंस शीट के इन दोनों पक्षों को ठीक करने की जरूरत है। हालांकि इससे भी अधिक बैंक और रेगुलेटर को पर्याप्त डिस्क्लोजर पर काम करने की जरूरत है। आखिर में संदेहों को दूर करने के लिए पर्याप्त जानकारी मुहैया कराना ही सबसे अहम उपाय होता है।