यस बैंक दो साल पहले अपने लगभग पतन पर आ गया था, जिसके बाद उसे काफी नाटकीय तरीके से रेस्क्यू किया गया। इसके बाद से यस बैंक ने अब तक लंबा सफर तय कर लिया है। हालांकि निवेशकों के लिए भारतीय प्राइवेट सेक्टर बैंकिंग में विश्वास करना अभी भी थोड़ा मुश्किल हो रहा है। कहावत भी है, 'दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है।'
