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RBL बैंक को निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए अपनी लोन बुक और लीडरशिप से जुड़ी चिंताओं को करना होगा दूर

RBL बैंक ने शनिवार को मीडिया और निवेशकों से बातचीत कर उनकी चिंताओं को दूर करने की कोशिश की, लेकिन यह काम नहीं किया

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 27, 2021 पर 5:06 PM
RBL बैंक को निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए अपनी लोन बुक और लीडरशिप से जुड़ी चिंताओं को करना होगा दूर
कोरोना महामारी के बाद से RBL बैंक का ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस कमजोर हुआ है

यस बैंक दो साल पहले अपने लगभग पतन पर आ गया था, जिसके बाद उसे काफी नाटकीय तरीके से रेस्क्यू किया गया। इसके बाद से यस बैंक ने अब तक लंबा सफर तय कर लिया है। हालांकि निवेशकों के लिए भारतीय प्राइवेट सेक्टर बैंकिंग में विश्वास करना अभी भी थोड़ा मुश्किल हो रहा है। कहावत भी है, 'दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है।'

लीडरशिप में अचानक से बदलाव और बोर्ड-रूम में रेगुलटर की अगुआई में बदलाव जैसे कदमों ने निवेशकों के संदेह को और बढ़ाया है। RBL बैंक अभी जिस नाजुक हालत में उलझा है, वह भी कुछ ऐसा ही है। बैंक के बोर्ड में RBI की तरफ से एडिशनल डायरेक्टर नियुक्त करना और उसके मैनेजिंग डायरेक्टर विश्ववीर आहूजा का अचानक अपना पद छोड़कर अनिश्चित छुट्टी पर चले जाने ने निवेशकों के विश्वास को झकझोर कर रख दिया है।

मुंबई मुख्यालय वाले RBL बैंक ने 26 दिसंबर को मीडिया और निवेशकों के साथ जल्दबाजी में बातचीत कर उनकी चिंताओं को दूर करने की कोशिश की, लेकिन ऐसा लगता है कि इससे कुछ फायदा नहीं हुआ क्योंकि एक दिन बाद सोमवार को बैंक का स्टॉक गिर गया।

कई एनालिस्ट भी बैंक के स्पष्टीकरण से आश्वस्त नहीं हैं। जेफरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Jefferies India Pvt Ltd) के एनालिस्टों ने बताया, "उत्तराधिकार के मुद्दे पर, मैनेजमेंट समयसीमा या संभावित उम्मीदवारों को लेकर सीमित स्पष्टता ही मुहैया कर सका। हालांकि मैनेजमेंट की तरफ से कहा गया है कि एक औपचारिक कमेटी संभावित उम्मीदवारों (आंतरिक और बाहरी) के नाम शॉर्टलिस्ट कर RBI को जमा करेगी। इस कमेटी में बोर्ड के सदस्य भी शामिल रहेंगे।"

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