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Russia-Ukraine Conflict : अमेरिका और यूरोप ने रूस को SWIFT से बाहर किया, क्या है स्विफ्ट और रूस पर पड़ेगा कितना असर?

स्विफ्ट का इस्तेमाल दुनिया के 200 देश और 11,000 बैंक करते हैं। यह पैसे के ट्रांसफर में मिडलमैन की भूमिका निभाता है। यह ट्रांजेक्शन की डिटेल को वेरिफाय करता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 28, 2022 पर 10:12 AM
Russia-Ukraine Conflict : अमेरिका और यूरोप ने रूस को SWIFT से बाहर किया, क्या है स्विफ्ट और रूस पर पड़ेगा कितना असर?
SWIFT रूस के लिए बहुत अहम है। इसकी वजह यह है कि रूस दुनिया में एनर्जी का बड़ा सप्लायर है। वह कई देशों को अरबों डॉलर मूल्य के ऑयल एंड गैस का एक्सपोर्ट करता है। इसका पेमेंट हासिल करने के लिए वह स्विफ्ट प्लेटफार्म का इस्तेमाल करता है।

अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस को कमजोर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। रूस के कई बैंकों को स्विफ्ट के इस्तेमाल से रोक दिया गया है। स्विफ्ट का मतलब है-Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication। इसे संक्षेप में SWIFT कहा जाता है। स्विफ्ट से रूस को बाहर करने को अमेरिका और यूरोप के सबसे सख्त कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस फैसले ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बैचेन कर दिया है। आइए जानते हैं क्या है SWIFT, इससे बाहर होने से रूस पर कितना असर पड़ेगा, यह कैसे काम करता है।

क्या है SWIFT?

SWIFT सबसे बड़ा इंटरनेशनल पेमेंट गेटवे है। रूस के बैंक अब इस गेटवे का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। अमेरिका और यूरोप ने रूस को इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम से अलग-थलग करने के लिए यह कदम उठाया है। उनका मकसद रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करना है। माना जा रहा है कि स्विफ्ट से बाहर करने के फैसले से पुतिन बौखला गए हैं। यही वजह है कि उन्हें परमाणु हथियार के इस्तेमाल की चेतावनी दी है।

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