भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए रूस से तेल और गैस की खरीद पर प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट दी है, लेकिन यह उनका अंतिम फैसला नहीं है। मतलब यह हुआ कि 100 प्रतिशत तक टैरिफ की तलवार अभी पूरी तरह से नहीं हटी है। स्थिति का आकलन करने के लिए समय की जरूरत है। यह बात अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कही है।
रॉयटर्स के मुताबिक, रुबियो ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप, रूस से जुड़े उन प्रतिबंधों और शुल्कों के वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर आर्थिक प्रभाव का आकलन करने के लिए 60 दिन तक का समय लेंगे, जिन्हें उन्होंने एक दिन पहले ही हटाया है। फ्लोरिडा के पाम बीच में अपने मार-ए-लागो क्लब में ट्रंप ने भी पत्रकारों से कहा, "आप में से बहुत लोगों को अभी तक यह नहीं पता है कि मेरा फैसला क्या है, लेकिन हम इसका पता लगा लेंगे, और आपको भी पता चल जाएगा।"
अमेरिका के ईरान के साथ तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं और ट्रंप पर दबाव है। ट्रंप ने शुक्रवार को राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत 'ग्राहम एक्ट' के अंतर्गत लगाए गए प्रमुख प्रतिबंधों और शुल्कों (टैरिफ) में छूट दी गई है। इन उपायों में रूस के सामानों पर टैरिफ लगाना और रूस से तेल व गैस खरीदने वाले देशों पर जुर्माना लगाना शामिल था। यह कानून अगले हफ्ते से लागू होने वाला था। शुक्रवार के आदेश में यह नहीं बताया गया कि यह छूट कितने समय तक रहेगी, लेकिन रुबियो ने कहा कि ट्रंप ने 60 दिनों की समीक्षा का विकल्प चुना है।
‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ ट्रंप को रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाने और रूस से सबसे अधिक तेल व गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इस कानून को ग्राहम कानून के नाम से जाना जाता है। इसे अमेरिकी कांग्रेस ने 16 सितंबर को पास किया था और ट्रंप ने दो दिन बाद इसे साइन किया था।
इस कानून के तहत ट्रंप को इसे लागू किए जाने के 30 दिन के अंदर रूस से कच्चा तेल या गैस आयात करने वाले 5 सबसे बड़े देशों से अमेरिका में आने वाले सभी सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया था। ग्राहम कानून की धारा 115 में यह प्रावधान भी है कि अगर प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों को लागू करने से छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में हो, तो राष्ट्रपति ऐसी छूट दे सकते हैं।
'भारत रातों-रात रूसी तेल से नहीं हो सकता शिफ्ट'
रूस से सबसे अधिक तेल व गैस खरीदने वाले देशों में चीन और भारत शामिल हैं। ग्राहम कानून के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और ड्यूटीज से छूट के नए फैसले से अमेरिका जाने वाले भारतीय सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ की तलवार फिलहाल के लिए हट गई है। भारत की स्थिति पर रुबियो ने माना कि भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास किए हैं, लेकिन वह अभी भी काफी हद तक रूस से आपूर्ति पर निर्भर है।
उन्होंने कहा, "भारत जैसे देश अपनी मर्जी से अपने एनर्जी पोर्टफोलियो में विविधता लेकर आए हैं, लेकिन वे अभी भी रूस से काफी मात्रा में एनर्जी प्राप्त कर रहे हैं, क्योंकि रातों-रात पूरी तरह से शिफ्ट हो पाना मुश्किल होता है।"