डिपॉजिट ग्रोथ को लेकर बेफिक्र SBI, चेयरमैन दिनेश खारा को म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री से नहीं दिख रही कोई चुनौती

Banking vs Mutual Fund Industry: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई के लिए चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही मिली-जुली रही। सालाना आधार पर इसका मुनाफा और डिपॉजिट ग्रोथ दोनों बढ़ा, लेकिन तिमाही आधार पर दोनों में ही गिरावट आई। अब बैंक के चेयरमैन दिनेश खारा का कहना है कि डिपॉजिट ग्रोथ को लेकर कोई दिक्कत नहीं है

अपडेटेड Aug 23, 2024 पर 4:01 PM
SBI के चेयरमैन दिनेश कुमारा खारा से बैंकिंग सिस्टम में डिपॉजिट ग्रोथ और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के तेजी से आगे बढ़ने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में आमतौर पर बैंकिंग सिस्टम मार्केट से बड़ा होता है।

पब्लिक सेक्टर में देश के सबसे बड़े बैंक SBI को डिपॉजिट ग्रोथ में कोई चुनौती नहीं दिख रही है। बैंक के चेयरमैन दिनेश खारा ने ये बातें कही हैं। उन्होंने ये बातें आज 23 अगस्त को मुंबई में एक इवेंट से अलग बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि बैंक इस स्थिति में है कि वह अपने लोन बुक की ग्रोथ को सपोर्ट कर सके। उन्होंने आगे कहा कि जब लोन बुक की ग्रोथ अच्छी बनी हुई है, बैंक के सामने कोई चुनौती नहीं दिख रही है। उन्होंने ये बातें म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की तेज ग्रोथ को लेकर बैंकिंग इंडस्ट्री और डिपॉजिट ग्रोथ को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कही।

Mutual Fund Industry के सामने कितनी मजबूत रहेगी डिपॉजिट ग्रोथ?

एसबीआई के चेयरमैन दिनेश कुमारा खारा से बैंकिंग सिस्टम में डिपॉजिट ग्रोथ और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के तेजी से आगे बढ़ने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में आमतौर पर बैंकिंग सिस्टम मार्केट से बड़ा होता है। उन्होंने कहा कि यूनाइटेड किंगडम में बैंकिंग सिस्टम मार्केट की तुलना में और बड़ा होता जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सब कुछ निवेशकों की पसंद और बैकिंग सिस्टम के प्रोडक्ट्स पर ही निर्भर है।


SBI के लिए कैसी रही इस वित्त वर्ष की शुरुआत?

चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2024 में बैंक का डिपॉजिट सालाना आधार पर 45.31 लाख करोड़ रुपये से 8.18 फीसदी उछलकर 49.02 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि तिमाही आधार पर इसके डिपॉजिट में 0.29 फीसदी की मामूली गिरावट आई। जून तिमाही में इसका मुनाफा सालाना आधार पर 1 फीसदी उछलकर 17,035.16 करोड़ रुपये पर पहुंच गया लेकिन तिमाही आधार पर इसमें 17.7 फीसदी की गिरावट आई। हालांकि बैंक के एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है और जून तिमाही के आखिरी में नेट एनपीए सालाना आधार पर 0.71 फीसदी से सुधरकर 0.57 फीसदी पर आ गया।

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