Paytm की पैरेंट कंपनी वन 97 कम्यूनिकेशंस जब नवंबर 2021 में घरेलू मार्केट में लिस्ट हुई थी तो 18300 करोड़ रुपये का इसका आईपीओ उस समय तक का सबसे बड़ा घरेलू इश्यू था। हालांकि उसके बाद से 14 महीने Paytm के लिए आसान नहीं रहे हैं। पेटीएम में निवेशकों का पैसा 75 फीसदी घट चुका है। वहीं कंपनी लगातार खुदरा निवेशकों, मार्केट एनालिस्ट्स और एडवायजरी फर्म की निगेटिव लिस्ट में है। तगड़े घाटे के चलते आलोचनाओं के बीच मैनेजमेंट का कहना है कि कंपनी जल्द ही मुनाफे की स्थिति में आने ही वाली है।
कंपनी ने लोन डिस्बर्सल सेग्मेंट में अपनी ग्रोथ से चौंकाया भी है लेकिन बाजार को अभी तक पेटीएम पर भरोसा नहीं हो रहा है। ऐसे में दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा (Vijay Shekhar Sharma) से मनीकंट्रोल की चंद्रा श्रीकांत ने कंपनी की पिछले एक साल की यात्रा और आगे की योजनाओं समेत टेक और स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर चर्चा की।
यूनिकॉर्न और लिस्टेड कंपनी की अलग हैं चुनौतियां
शर्मा के मुताबिक यूनिकॉर्न और लिस्टेड कंपनी के तौर पर पेटीएम के सफर की बात की जाए तो दोनों की ही चुनौतियां अलग हैं। यूनीकॉर्न में कारोबार को आगे बढ़ाने पर जोर होता है और किसी बिजनेस पर सोचते हैं और फिर इस पर आगे बढ़ते या छोड़ते हैं। हालांकि जब आप लिस्ट हो जाते हैं तो जो पूंजी आईपीओ के जरिए जुटाई गई है, उसे लेकर एक जवाबदेही हो जाती है। ऐसे में शर्मा के मुताबिक प्राइवेट यूनीकॉर्न टीनएज के समान है लेकिन लिस्टेड होना अडल्टहुड की तरह है।
मैनेजमेंट पूरी कोशिश कर रही मुनाफे में आने की
शेयरों में गिरावट को लेकर पूछे गए सवाल पर शर्मा ने कहा कि कंपनी का मैनेजमेंट लॉन्ग टर्म में फ्री कैश जेनेरेटिंग कंपनी के साथ-साथ मुनाफे वाली और पारदर्शी व्यवस्था वाली कंपनी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं जब ESOP यानी (एंप्लाई स्टॉक ओनरशिप प्लान) ग्रांट्स पर प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म IIAS (इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर एडवायजरी सर्विसेज इंडिया) की शिकायतों के बारे में पूछा गया तो शर्मा ने कहा कि यह प्रक्रिया शेयरधारकों की मंजूरी से पूरी तरह पारदर्शी तरीके से हुई है। IIAS ने ईएसओपी मामले में सेबी से हस्तक्षेप की मांग की थी।
Paytm के बिजनेस का आगे क्या है प्लान
छोटा कर्ज देने के मामले में अवसरों की भरमार है यानी कि कर्ज देने वाली जिस संस्था के पास अच्छा-खासा फंड है, वह इस अवसर को भुना सकता है। यहां पेटीएम बड़ी भूमिका निभा सकता है क्योंकि इसके ग्राहक लेंडर्स भी हैं और ग्राहक लोन लेने वाले भी। पेटीएम का फोकस फिलहाल पेमेंट और लोन बांटने पर रहने वाला है। हालांकि कुछ और प्रोडक्ट लाने की भी तैयारी चल रही है।
Crypto को लेकर पॉजिटिव हैं पेटीएम के सीईओ
क्रिप्टोकरेंसीज को लेकर कोई रेगुलेशन नहीं है और इस वजह से निवेशकों को यह पूरी तरह से आकर्षित नहीं कर पा रहा है। हालांकि पेटीएम के फाउंडर शर्मा के मुताबिक क्रिप्टो अपना रास्ता खुद खोज लेगा। उनके मुताबिक कोई भी नई तकनीक आती है तो उसे थोड़ा समय लगता है और अभी इसे लेकर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।