स्टूडेंट्स का फ्यूचर बनाने वाली Unacademy क्या अपना भविष्य सुरक्षित कर पाएगी? जानिए इस स्टार्टअप की अंदर की कहानी
Unacademy 2022 की शुरुआत से अब तक 800 से ज्यादा एंप्लॉयीज को नौकरी से हटा चुकी है। मामले की जानकारी रखने वालों का दावा है कि छंटनी की असली संख्या इससे बहुत ज्यादा है। बदलते माहौल में उसने ऑफलाइन सेंटर्स पर अपना फोकस बढ़ाया है
UNACADEMY की शुरुआत मेडिकल और इंजीनिरिंग कॉलेज के एंट्रेंस टेस्ट्स के लिए स्टूडेंट्स की मदद करने वाले एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के रूप में हुई थी। इसे 2015 में गौरव मुंजाल ने रोमन सैनी और हेमेश सिंह के साथ मिलकर शुरू किया था।
Unacademy ने 7 नवंबर, 2022 को एंप्लॉयीज के दूसरे दौर की छंटनी (layoffs) का ऐलान किया। इस एडटेक स्टार्टअप के को-फाउंडर और सीईओ गौरव मुंजाल ने एंप्लॉयीज को बताया कि कंपनी एंप्लॉयीज की संख्या में और 10 फीसदी कमी करने जा रही है। इसका मतलब था कि करीब 350 एंप्लॉयीज की नौकरी चली जाएगी। ठीक चार महीने पहले मुंजाल ने कहा था कि कंपनी में और छंटनी नहीं होगी। इंडिया के इस दूसरे सबसे बड़े एडटेक स्टार्टअप की तब 3.4 अरब डॉलर वैल्यू लगाई गई थी।
अब तक 800 से ज्यादा एप्लॉयीज की छंटनी
Unacademy ने 2022 की शुरुआत से 800 से ज्यादा एंप्लॉयीज को नौकरी से हटा चुका है। पिछले साल जुलाई की छंटनी के दौरान कंपनी ने और छंटनी से इनकार किया था। उसने कहा था कि कंपनी स्लोडाउन से निपटने के लिए छंटनी की जगह कॉस्ट घटाने के दूसरे तरीकों पर जोर देगी। इनमें एग्जिक्यूटिव्क के ट्रैवल खर्च में कमी, ऑफिसेज में एंप्लॉयीज की फ्री मील पर रोक और हटाए गए एंप्लॉयीज को कंपनी के दूसरे डिपार्टमेंट में एडजस्ट करने की कोशिश शामिल थी। लेकिन, लगता है कि ये वादे झूठे थे।
ज्यादातर वर्टिकल्स का खराब प्रदर्शन
एंप्लॉयीज को पहले से दोबारा छंटनी का अंदाजा हो गया था। इसकी वजह यह थी कि कंपनी के मुख्य बिजनेस में स्लोडाउन दिख रहा था। इसने जो नई चीजें शुरू की थी, उनमें भी ग्रोथ नहीं दिख रही थी। मार्च में नौकरी से हटाए गए एक सीनियर पूर्व एंप्लॉयी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, "मैंने दिसंबर 2019 में अनएकैडमी में नौकरी शुरू की थी। मेरे शुरुआती दो साल बहुत अच्छे थे। लेकिन, अचानक पिछले साल से दिक्कतें आने लगीं। ऐसा लगा कि हम एक साथ कई चीजें करने की कोशिश कर रहे हैं और इससे हमें कोई मदद नहीं मिल रही है।"
जरूरत से ज्यादा विस्तार से नुकसान
उन्होंने बताया कि Unacademy जितना पचा सकती थी, उससे ज्यादा खाने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने कहा, "कंपनी ने कई वर्टिकल्स शुरू करने के कुछ ही समय बाद बंद कर दिए। शुरुआत करने से पहले आपके पास ठोस प्लान होना जरूरी है। खासकर तब जब इसमें काफी पैसा खर्च हो रहा हो। शायद कोरोना की महामारी के बाद मैनेजमेंट को ऐसा करना ठीक लग रहा था। लेकिन, कंपनी के अंदर कोई यह महसूस कर सकता था कि इससे मदद नहीं मिल रही है और इसका मतलब है कि आगे और छंटनी और और दिक्कतें तय हैं।"
एंप्लॉयीज को अंधरे में रखा गया
मुंजाल ने जब पिछले साल नवंबर में छंटनी का ऐलान किया था तब उन्होंने कहा था कि प्रभावित एंप्लॉयीज को 48 घंटे के अंदर एचआर से डिटेल जानकारी मिल जाएगी। तब अकाउंट मैनेजर का काम कर रहे एक व्यक्ति को अगले दो दिन में न तो किसी तरह की जानकारी मिली और न ही उस महीने HR से कोई ईमेल मिला। उन्होंने बताया, "जब छंटनी का ऐलान हुआ, तब मुझे यकीन हो गया था कि इसमें मेरा नाम भी शामिल होगा। हमारी टीम को कहा गया कि बड़े लेवल की छंटनी और इस्तीफों की वजह से एंप्लॉयीज की कमी हो गई है और इसलिए हर व्यक्ति को अतिरिक्त घंटे काम करने होंगे। लेकिन, मुझे कोई काम नहीं दिया गया। करीब एक महीने तक जब मुझे कोई लेटर भी नहीं मिला तो मुझे हैरानी हुई।"
छंटनी की असल संख्या काफी ज्यादा
पूर्व अकाउंट मैनेजर ने बताया कि अनएकैडमी ने जितना बताया है उससे ज्यादा एंप्लॉयीज की छंटनी की है। यह काम चुपके से किया गया है। दरअसल, छंटनी की कम संख्या बताकर कंपनी अपनी छवि खराब होने से बचाने की कोशिश कर रही है। पिछले साल अप्रैल में टीम की ताकत 6000 थी, जो अब घटकर 2,500 रह गई है। ऐसा लगता है कि कंपनी एक बार छंटनी करती है। फिर, उसे लगता है कि और छंटनी करनी पड़ेगी तो वह फिर से छंटनी करती है।
वर्क कल्चर में बड़ा बदलाव
अकाउंट मैनेजर ने बताया कि पिछले 12 महीनों में वर्क कल्चर पूरी तरह बदल गया है। इसकी वजह है कि कंपनी ने खर्च घटा दिया है। उन्होंने बताया कि एक बार काम से जुड़ी एक बड़ी उपलब्धि के बाद हमारी टीम ने अपने खर्च पर बेंगलुरु में सेलिब्रेट करने का फैसला किया। पहले इस तरह के सेलिब्रेशन ऑफिस में हुआ करते थे। इस स्टार्टअप में 2020 और 2021 में हुए इनवेस्टमेंट की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि अनएकैडमी ने नए वर्टिकल्स में अपनी पैठ बनाने की कोशिश शुरू की। फंडिंग इनवायरमेंट से उसे सपोर्ट मिला। लेकिन, मुंजाल ऐसा कोई वर्टिकल नहीं बना सकें जो उन्हें मुनाफा दे सके।
2015 में हुई थी शुरुआत
Unacademy की शुरुआत मेडिकल और इंजीनिरिंग कॉलेज के एंट्रेंस टेस्ट्स के लिए स्टूडेंट्स की मदद करने वाले एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के रूप में हुई थी। इसे 2015 में मुंजाल ने रोमन सैनी और हेमेश सिंह ने शुरू किया था। मुंजाल 2010 से ही एक यूट्यूब चैनल के रूप में इसे चला रहे थे। अनएकैडमी से पहले मुजाल ने Flat.chat शुरू किया था। यह कॉलेज स्टूडेंट्स और बैचलर के लिए एक रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म था। उन्होंने इसे 2014 में कॉमनफ्लोर को बेच दिया था। अगले साल Quikr ने इसे खरीद लिया था। उसके बाद यह बंद हो गई थी।
कोरोना की महामारी बनी वरदान
स्टूडेंट्स के बीच अनएकैडमी बहुत जल्द लोकप्रिय हो गई। स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल से इसे काफी मदद मिली। FY20 इसका रेवेन्यू 60 करोड़ पार कर गया। इसकी रणनीति बहुत सामान्य थी। यूट्यूब और दूसरे कोचिंग हब से स्टार टीचर्स को हायर करो और स्टूडेंट्स को अट्रैक्ट करने के लिए उनका इस्तेमाल करो। कोरोना की महामारी इस स्टार्टअप के लिए वरदान बनकर आई। FY21 में इसका ऑपरेटिंग रेवेन्यू करीब 400 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी ने टैलेंट हायर करने में बहुत निवेश किया। इसने अपने ब्रांड को स्ट्रॉन्ग बनाने पर भी फोकस किया।
ग्रोथ के रास्ते में दिक्कत
कोरोना की महामारी कमजोर पड़ने के बाद अनएकैडमी की ग्रोथ सुस्त पड़ने का अनुमान था। मुंजाल के मुताबिक 2023 में इस स्टार्टअप के कोर बिजनेस में करीब 15 फीसदी गिरावट की उम्मीद है। उन्होंने अपनी टीम को बिजनेस अपडेट्स दिया है। कंपनी 2023 में 620 करोड़ रुपये रेवेन्यू हासिल करने की कोशिश कर रही है। मनीकंट्रोल से बातचीत में मुंजाल ने पिछले हफ्ते बताया था कि कोरोना के दौरान हमने काफी मार्केटिंग की थी। कुछ मार्केटिंग का फायदा नहीं मिला। जब हमने इस पर रोक लगाने का फैसला किया तब हमारा बेसलाइन रेवेन्यू गिर गया। हमने ऑनलाइन की ग्रोथ बहुत ज्यादा रहने का अनुमान लगाया था।
ऑफलाइन सेंटर्स पर फोकस
अभी टेस्ट की तैयारी और कोचिंग के लिए अनएकैडमी के देशभर में 10 ऑफलाइन सेंटर्स हैं। कंपनी ने इस साल के अंत तक 58 नए सेंटर्स ओपन करने का प्लान बनाया है। इस साल के अंत तक कंपनी का टारगेट 55,000 लर्नर्स तक पहुंचने का है। उसे ऑफलाइन कोचिंग सेंटर से 400 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल होने का अनुमान है। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऑफलाइन ग्रोथ ऑनलाइन के मुकाबले स्लो रह सकती है। अभी देश में जो स्थिति है उसमें ऑफलाइन में थोड़ी ग्रोथ भी ज्यादा मानी जाएगी।
वजूद बचाने की लड़ाई
मनीकंट्रोल ने मार्च में खबर दी थी कि ऑफलाइन का प्रदर्शन ऑनलाइन के मुकाबले बेहतर रहने की उम्मीद को देखते हुए अनएकैडमी के इनवेस्टर्स ने बायजूस की आकाश एजुकेशनल सर्विसेज से बातचीत शुरू की थी। कंपनी का प्लान दोनों का विलय करना था। देश में एडटेक कंपनियों को आ रही मुश्किलों को देखते हुए ऑफलान सेंटर्स अनएकैडमी के लिए उम्मीद की किरण की तरह हैं। हालांकि, आने वाला समय यह बताएगा कि सॉफ्टबैंक के निवेश वाली यह कंपनी मुश्किलों का किस तरह से सामना करती है।