TCS Q3 Results: नए लेबर कोड्स से TCS को लगा ₹2128 करोड़ का झटका, मुनाफे पर भी दिखा असर

TCS Q3 Results: टाटा ग्रुप की आईटी कंपनी TCS के Q3 नतीजों पर नए लेबर कोड्स का बड़ा असर दिखा। ₹2,128 करोड़ के एक्सेप्शनल खर्च से मुनाफा दबाव में आया। कानूनी विवाद और रिस्ट्रक्चरिंग लागत भी नतीजों पर भारी पड़ी। हालांकि छंटनी से जुड़ा खर्च घटता दिखा। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Jan 12, 2026 पर 5:02 PM
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TCS ने अमेरिका में चल रहे एक कानूनी विवाद के चलते ₹1,010 करोड़ का एक और एक्सेप्शनल आइटम दर्ज किया है।

TCS Q3 Results: टाटा ग्रुप की दिग्गज आईटी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) ने 12 जनवरी को बताया कि भारत में लागू हुए नए लेबर कोड्स का कंपनी पर सीधा असर पड़ा है। इन कानूनों की वजह से कंपनी को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। यही खर्च Q3 FY26 के नतीजों में दिखाया गया है।

TCS ने इस खर्च को ₹2,128 करोड़ के एक्सेप्शनल आइटम के रूप में दर्ज किया है। यह तिमाही अक्टूबर से दिसंबर के बीच की है। इतना बड़ा अतिरिक्त खर्च जुड़ने से कंपनी के मुनाफे पर दबाव बना।

Q3 में 14 फीसदी गिरा नेट प्रॉफिट


मौजूदा वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में TCS का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14 फीसदी गिरकर ₹10,657 करोड़ रह गया। कंपनी ने साफ किया कि यह गिरावट मुख्य रूप से एक्सेप्शनल खर्चों की वजह से हुई है।

वेतन की परिभाषा बदली, ग्रेच्युटी खर्च बढ़ा

TCS ने बताया कि उसने कानूनी सलाह और उपलब्ध जानकारी के आधार पर नए श्रम कानूनों के असर का आकलन किया है। कंपनी के मुताबिक, ₹1,816 करोड़ का अतिरिक्त खर्च ग्रेच्युटी से जुड़ा है। वहीं, ₹312 करोड़ की लागत लॉन्ग-टर्म कम्पेन्सेटेड एब्सेन्सेस की वजह से आई है। यह पूरा असर वेज (वेतन) की परिभाषा में बदलाव के कारण पड़ा है।

भारत के चार नए श्रम कानून- Code on Wages, Industrial Relations Code, Code on Social Security और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code 21 नवंबर से लागू हुए हैं।

कानूनी विवाद से ₹1,010 करोड़ का झटका

TCS ने अमेरिका में चल रहे एक कानूनी विवाद के चलते ₹1,010 करोड़ का एक और एक्सेप्शनल आइटम दर्ज किया है। यह मामला कंप्यूटर साइंसेज कॉर्पोरेशन की ओर से दायर किया गया है। इसमें ट्रेड सीक्रेट्स और गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं।

TCS ने कहा कि बाहरी वकीलों से सलाह लेने के बाद कंपनी को अपने पक्ष में मजबूत केस होने का भरोसा है। वह फिफ्थ सर्किट कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए कानूनी विकल्पों का पूरा इस्तेमाल करेगी।

रिस्ट्रक्चरिंग लागत में तेज गिरावट

पिछले साल TCS ने रिस्ट्रक्चरिंग और छंटनी का फैसला लिया था। उसी प्रक्रिया से जुड़ा खर्च कंपनी अभी भी दर्ज कर रही है। Q3 FY26 में इस मद में ₹253 करोड़ की एक्सेप्शनल लागत दिखाई गई है। कंपनी ने बताया कि यह रकम उन कर्मचारियों को दिए गए टर्मिनेशन बेनिफिट्स से जुड़ी है, जो तय नीति के तहत दिए गए।

अगर इसे पिछली तिमाही से तुलना करें, तो तस्वीर साफ हो जाती है। पिछली तिमाही में यही खर्च ₹1,135 करोड़ था। इस लिहाज से ताजा तिमाही में रिस्ट्रक्चरिंग का खर्च करीब 77 फीसदी कम हो गया है। इसका मतलब यह है कि छंटनी और संगठन में बदलाव का सबसे भारी वित्तीय असर अब कंपनी पीछे छोड़ चुकी है।

AI-फर्स्ट ट्रांसफॉर्मेशन पर कंपनी का जोर

TCS के चीफ HR ऑफिसर Sudeep Kunnumal ने कहा कि कंपनी के कर्मचारी ही AI-फर्स्ट एंटरप्राइज बनने की रणनीति का केंद्र हैं। उनके मुताबिक, फिलहाल 2.17 लाख से ज्यादा कर्मचारी एडवांस्ड AI स्किल्स से लैस हैं, जो बड़े पैमाने पर क्लाइंट्स के लिए वैल्यू डिलीवर कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने हायर-ऑर्डर स्किल्स वाले फ्रेश ग्रेजुएट्स की भर्ती दोगुनी की है, ताकि नेक्स्ट-जेन टैलेंट पूल तेजी से तैयार किया जा सके। उनका कहना है कि AI के दौर में जिम्मेदार इनोवेशन और टिकाऊ ग्रोथ के लिए यही सबसे बड़ी ताकत है।

TCS Q3 Results: टीसीएस का मुनाफा दिसंबर तिमाही में 14% गिरकर 10657 करोड़ रहा

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