TCS Q3 Results: टीसीएस का मुनाफा दिसंबर तिमाही में 14% गिरकर 10657 करोड़ रहा

TCS Q3 Results: टीसीएस ने 12 जनवरी को नतीजों का ऐलान किया। दिसंबर तिमाही में कंपनी के प्रॉफिट पर नए लेबर कोड्स का असर पड़ा है। हालांकि, कंपनी का प्रॉफिट इस दौरान 14 फीसदी गिरकर 10,657 करोड़ रुपये रहा

अपडेटेड Jan 12, 2026 पर 5:30 PM
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टीसीएस ने कहा है कि उसने देश के नए लेबर कोड्स के संभावित असर का आकलन किया है।

टीसीएस ने दिसंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान 12 जनवरी को कर दिया। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 14 फीसदी गिरकर 10,657 करोड़ रुपये रहा। दिसंबर तिमाही में कंपनी के प्रॉफिट पर रीस्ट्रक्चरिंग, लेबल लॉज में बदलाव और लंबे समय से अमेरिका में चल रही कानूनी लड़ाई जैसे बड़े एक्सेप्शनल चार्जेज का असर पड़ा। कंपनी ने प्रति शेयर 57 रुपये डिविडेंड का ऐलान किया है। इसमें प्रति शेयर 46 रुपये का स्पेशल डिविडेंड शामिल है। इसकी रिकॉर्ड डेट 17 जनवरी, 2026 है।

एक्सेप्शनल आइटम्स का कंपनी के प्रॉफिट पर असर

कंपनी ने कहा है कि 2,128 करोड़ रुपये के एक्सेप्शनल आइटम का दिसंबर तिमाही में उसके प्रॉफिट पर निगेटिव असर पड़ा। टीसीएस देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। कंपनी के रिजल्ट्स मार्केट के अनुमान से कमजोर रहे। सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने कंपनी का नेट प्रॉफिट 12,771 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद जताई थी।


दिसंबर तिमाही में रेवेन्यू में साल दर साल आधार पर इजाफा

दिसंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 5 फीसदी बढ़कर 67,087 करोड़ रुपये रहा। यह एनालिस्ट्स के अनुमान के मुताबिक है। अगर एक्सेप्शनल आइटम्स को छोड़ दिया जाए तो दिसंबर तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉपिट 8.5 फीसदी बढ़कर 13,438 करोड़ रुपये आता है।

कंपनी के प्रदर्शन पर इन तीन चीजों का बड़ा असर

दिसंबर तिमाही में कंपनी पर रीस्ट्रक्चरिंग एक्सपेंसेज का असर पड़ा। कंपनी ने जुलाई 2025 में वर्कफोर्स में बदलाव का ऐलान किया था। इसमें जिन एंप्लॉयीज की सेवाओं की जरूरत नहीं रह गई थी, उनके लिए टर्मिनेशन बेनेफिट्स शामिल है। दूसरा, कंपनी पर नए लेबर कोड्स का असर पड़ा है। तीसरा, टीसीएस को अमेरिका में लंबे समय से चले आ रहे एक कानूनी विवाद के लिए प्रोविजनिंग करनी पड़ी।

कंपनी पर देश के नए लेबर कोड्स का असर

टीसीएस ने कहा है कि उसने देश के नए लेबर कोड्स के संभावित असर का आकलन किया है। इसके बारे में जानकारी सार्वजनिक की है। उसने इस बारे में कानूनी राय भी ली है। कंपनी ने कहा है, " ग्रैच्युटी का इंक्रीमेंटल इम्पैक्ट 1,816 करोड़ रुपये होगा। वेज की परिभाषा में बदलाव से कंपनसेशन में 312 करोड़ रुपये का असर लॉन्ग टर्म में पड़ेगा।" इसका मतलब है कि नए लेबर कोड्स से कंपनी पर कुल 2,182 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा।

दिसंबर तिमाही में प्रदर्शन स्टेबल रहने की उम्मीद

बाजार को टीसीएस का दिसंबर तिमाही में प्रदर्शन स्टेबल रहने का अनुमान था। बाजार का फोकस कंपनी के आईआई आधारित ग्रोथ, कैपिटल एलोकेशन और मार्जिन पर था। एलकेपी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट अंशुल जेटी ने कहा कि कंपनी के नतीजे उम्मीद के मुताबिक हैं। मार्केट को दिसंबर तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन कमजोर रहने की उम्मीद थी।

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12 जनवरी को कंपनी के शेयर 1 फीसदी से ज्यादा चढ़े

टीसीएस ने दिसंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान स्टॉक मार्केट बंद होने के बाद किया। 12 जनवरी को कंपनी का शेयर 1.10 फीसदी चढ़कर 3,243 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में कंपनी का शेयर 24 फीसदी से ज्यादा फिसला है।

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