टाटा ग्रुप की टाइटन कंपनी अपने प्रीमियम और लग्जरी घड़ी कारोबार को बढ़ा रही है। रणनीति के तहत कंपनी छोटी और उभरती घड़ी कंपनियों में निवेश करने या उन्हें खरीदने के विकल्प पर विचार कर रही है। कंपनी को इस साल त्योहारी सीजन में उपभोक्ता मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। टाइटन कंपनी शेयर बाजार में लिस्टेड है। फास्ट्रैक, जूप, टाइटन रागा, कैरेटलेन, तनिष्क, स्किन, ऑक्टेन, सोनाटा, टाइटन आईप्लस, तनेरा (Taneira) आदि ब्रांड टाइटन के तहत आते हैं।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, टाइटन कंपनी की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर रंजनी कृष्णास्वामी का कहना है कि इस साल शादी का सीजन जल्दी शुरू होने और दिवाली देर से पड़ने से भी मांग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी माना कि कंपनी बढ़ती मांग के हिसाब से अपनी आपूर्ति क्षमता बढ़ाने के लिए काम कर रही है।
कृष्णास्वामी के मुताबिक, ‘‘हम बहुत मजबूत मांग की उम्मीद कर रहे हैं। त्योहारी सीजन की शुरुआत काफी अच्छी रही है। हम बहुत आशावादी हैं और सच कहें तो मांग पूरी करने के लिए जरूरी क्षमता सुनिश्चित करने में हमें चुनौती आ रही है।’’
सही समय और सही पार्टनर का इंतजार
ग्रोथ की रणनीति के तहत दूसरी कंपनियों के अधिग्रहण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि टाइटन ऐसे अवसरों का मूल्यांकन कर रही है, जो कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ की योजनाओं के अनुरूप हों और विभिन्न क्षेत्रों व बाजारों में टाइटन की मौजूदगी को मजबूत करने में मदद करें। कंपनी छोटी घड़ी कंपनियों में निवेश करने या उन्हें खरीदने पर भी विचार कर सकती है। कृष्णास्वामी के मुताबिक, टाइटन में इस विचार पर अंदरूनी तौर पर चर्चा हुई है, और कंपनी ने हमेशा महसूस किया है कि जब सही समय और सही पार्टनर मिलेगा, तो हमारे लिए ऐसा करना निश्चित रूप से दिलचस्प होगा। एक कंपनी के तौर पर टाइटन ने ज्वेलरी बिजनेस में ऐसा किया है, चाहे कैरटलेन को देख लें या विदेशों में किए गए कंपनी के कुछ अन्य निवेशों को।
कृष्णास्वामी ने कहा, "हम हमेशा इनऑर्गेनिक ग्रोथ (बाहरी निवेश या अधिग्रहण से विकास) और ऑर्गेनिक ग्रोथ (आंतरिक विकास) दोनों के लिए तैयार रहे हैं। बस जरूरी है कि यह पूरक हो और हमारी बड़ी ग्रोथ जर्नी में मदद करे।" इस समय छोटे और भारत पर फोकस्ड माइक्रो वॉच ब्रांड्स भारतीय डिजाइन और संस्कृति को ध्यान में रखकर प्रोडक्ट बना रहे हैं। ये मिलेनियल्स (युवा पीढ़ी) और ज्यादा आय वाले ग्राहकों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं।कृष्णास्वामी का मानना है कि ऐसे प्लेयर्स का आना टाइटन की मार्केट लीडरशिप के लिए खतरा नहीं, बल्कि इस कैटेगरी के लिए एक सकारात्मक बात है।
लिमिटेड-एडिशन और महंगी घड़ियों की अच्छी डिमांड
पीटीआई के मुताबिक, घड़ी के कारोबार में चल रहे ट्रेंड्स पर कृष्णास्वामी ने कहा कि कंपनी को अपने प्रीमियम सेगमेंट की घड़ियों की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी दिख रही है। यह सेगमेंट 25,000 रुपये से कम कीमत वाली कैटेगरी के मुकाबले लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ रहा है। वहीं 1,000 रुपये से कम कीमत वाली मास-मार्केट घड़ियों के सेगमेंट में काफी सुस्ती देखी जा रही है, क्योंकि घड़ियां अब लोगों के लिए पर्सनल स्टाइल स्टेटमेंट बनती जा रही हैं। लिमिटेड-एडिशन और महंगी घड़ियों की मांग काफी अच्छी है।
टाइटन भारत में अपने 'हेलियोस' (Helios) रिटेल नेटवर्क के जरिए टॉमी हिलफिगर, केनेथ कोल, पुलिस, सेरुटी और रोमर जैसे इंटरनेशनल ब्रांड्स की घड़ियां भी बेचती है। यह और ज्यादा किफायती स्विस ब्रांड्स लाने पर भी विचार कर रही है, क्योंकि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से इंपोर्ट की लागत कम हो सकती है।