China News: मार्केट की उम्मीद के मुताबिक ही लगातार 16वें महीने चीन ने बेंचमार्क ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है। चीन ने एक साल के लोन प्राइम रेट (LPR) को 3.00% और पांच साल के लोन प्राइम रेट को 3.50% पर स्थिर बनाए रखा है। न्यूज एजेंसी रायटर्स के सर्वे में शामिल 21 इकनॉमिस्ट्स ने भी ऐसी ही उम्मीद जाहिर की थी। चीन ने ऐसे समय में ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखा है, जब हाल ही में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढ़ाई थी और आने वाले महीनों में इसमें और बढ़ोतरी के आसार जताए थे।
क्या है ब्याज दरों को 16वें महीने स्थिर रखने का मतलब?
दुनिया के कुछ बड़े सेंट्रल बैंकों ने अधिक सख्त रुख रुख अपनाया है, और युआन मजबूत हो रहा है। ऐसे समय में चीन में लगातार 16वें महीने बेंचमार्क ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने से यह साफ हो गया है कि मौद्रिक नीतियों में ढील की गुंजाइश कम है। बता दें कि इससे पहले अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने महंगाई की रफ्तार को काबू में करने के लिए बेंचमार्क ब्याज दरें बढ़ा दी। इस बढ़ोतरी के बाद चीन के सरकारी बॉन्ड की तुलना में बेंचमार्क 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी पर यील्ड प्रीमियम रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया। चीन के सेंट्रल बैंक के गवर्नर पैन गोंगशेंग का कहना है कि चीन में लोन ग्रोथ का सुस्त होना अब न्यू नॉर्मल यानी आम बात बनती जा रही है, क्योंकि प्रॉपर्टी और लोकल गवर्नमेंट सेक्टर में गिरावट से क्रेडिट की मांग तेजी से घट रही है, और उभरते हुए उद्योग इस कमी को उतनी तेजी से पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?
मिज़ुहो सिक्योरिटीज की सीनियर चाइना स्ट्रैटेजिस्ट सेरेना झाऊ (Serena Zhou) का कहना है कि जब तक घरेलू मांग में बहुत अधिक कमी नहीं आती, चौथी तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर 2026 में बड़े पैमाने पर मॉनेटरी पॉलिसी में ढील की संभावना कम हो गई है। सेरेना के मुताबिक खासतौर से यह इसलिए है क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख अधिक सख्त यानी हॉकिश हो गया है।
बीएनपी पारिबास की चीफ चाइना इकनॉमिस्ट जैकलीन रोंग (Jacqueline Rong) का मानना है कि मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर चीन अपने रेट-कटिंग साइकल यानी ब्याज दरें घटाने के दौर के आखिरी चरण में है। उनका कहना है कि बैंक ऑफ चाइना इस साल अब ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है क्योंकि बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) कम है और अर्थव्यवस्था में डिफ्लेशन यानी कीमतों में गिरावट से हल्की महंगाई की स्थिति बन रही है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि अगर इकनॉमिक ग्रोथ उम्मीद से कमजोर रहती है तो ब्याज दरों में कटौती हो सकती है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।