Cabinet Decisions: नॉन-सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के लिए ₹23000 करोड़ की PLI स्कीम मंजूर, 91600 लोगों को मिलेगा डायरेक्ट एंप्लॉयमेंट

Union Cabinet Decisions: पैसिव इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग को प्रमोट करने के लिए लाई गई यह पहली स्कीम है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह स्कीम लगभग 59,350 करोड़ रुपये का निवेश अट्रैक्ट करेगी। स्कीम के लिए 22,919 करोड़ रुपये का कुल पैकेज 6 साल के लिए होगा

अपडेटेड Mar 28, 2025 पर 5:35 PM
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की मीटिंग के फैसलों की जानकारी दी।

केंद्र सरकार ने पैसिव या नॉन-सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम शुरू करने को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। इसके लिए आउटले 22,919 करोड़ रुपये रखा गया है। यह मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल की मीटिंग में दी गई। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीटिंग के फैसलों की जानकारी दी। वैष्णव ने कहा कि नॉन-सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स क्षेत्र के लिए लाई गई इस प्रोत्साहन योजना से करीब 59,350 करोड़ रुपये का निवेश आएगा।

पैसिव इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग को प्रमोट करने के लिए लाई गई यह पहली स्कीम है। मंत्री ने कहा कि यह स्कीम 91600 लोगों के लिए डायरेक्ट एंप्लॉयमेंट क्रिएट करेगी। साथ ही लगभग 59,350 करोड़ रुपये का निवेश अट्रैक्ट करेगी। स्कीम के लिए 22,919 करोड़ रुपये का कुल पैकेज 6 साल के लिए होगा।

स्कीम से 4.56 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन होने की उम्मीद


वैष्णव ने कहा कि यह सेगमेंट टेलिकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, मेडिकल डिवाइसेज, पावर सेक्टर आदि सहित कई क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगा। इस स्कीम से 4.56 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन होने की उम्मीद है। सरकार विभिन्न सेक्टर्स में लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए PLI योजना चलाती रही है। अब इसी सिलसिले में नॉन-सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स सेक्टर को भी जगह मिली है।

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इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों की बॉडी एल्सीना (इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के अनुसार, भारत में नॉन-सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स का उत्पादन 2022 में लगभग 13 अरब अमेरिकी डॉलर था। अगर कारोबार सामान्य रूप से जारी रहता है तो 2026 तक इसके लगभग 20.7 अरब डॉलर और 2030 तक लगभग 37 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

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