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Vedanta का चिप प्लांट बनाने का अटका प्रोजेक्ट, इन दो वजहों से नहीं बन पा रही बात

Vedanta Chip Plant: चीन और ताइवान पर चिप के लिए निर्भरता कम करने के लिए भारत में चिप प्लांट लगाने के लिए पीएम मोदी तक जोर दे चुके हैं। वेदांता इसे लेकर फॉक्सकॉन से मिलकर वेंचर भी बना चुका है। लेकिन इन दो कारणों से बात आगे नहीं आगे बढ़ पा रही है और वेदांता के फाउंडर-चेयरमैन अनिल अग्रवाल का चिप प्लांट का सपना लटकता दिख रहा है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Apr 06, 2023 पर 4:15 PM
Vedanta का चिप प्लांट बनाने का अटका प्रोजेक्ट, इन दो वजहों से नहीं बन पा रही बात
वेदांता रिसोर्सेज (Vedanta Resources) के चेयरमैन और फाउंडर अनिल अग्रवाल का चिप का सपना खटाई में पड़ता दिख रहा है। उनकी 1900 करोड़ डॉलर का चिप प्लांट लगाने की योजना में एक टेक्नोलॉजी पार्टनर तलाशने और सरकार से वित्तीय सहायता हासिल करने में चुनौतियों के चलते लड़खड़ा रही है।

वेदांता रिसोर्सेज (Vedanta Resources) के चेयरमैन और फाउंडर अनिल अग्रवाल के चिप का सपना अटकता दिख रहा है। उनकी 1900 करोड़ डॉलर का चिप प्लांट लगाने की योजना में एक टेक्नोलॉजी पार्टनर तलाशने और सरकार से वित्तीय सहायता हासिल करने में चुनौतियों के चलते लड़खड़ा रही है। सात महीने पहले अनिल अग्रवाल ने वेदांता रिसोर्स और ताइवान की Hon Hai Precision Industry यानी फॉक्सकॉन (Foxconn) के साथ चिप पार्टनरशिप का ऐलान किया था। हालांकि अभी तक किसी फैब्रिकेशन यूनिट ऑपरेटर या लाइसेंस मैन्युफैक्चरिंग-ग्रेड टेक्नोलॉजी के साथ बात नहीं बन पाई है। सरकार से वित्तीय सहायता हासिल करने के लिए इनमें से किसी एक की जरूरत पड़ती है।

कितनी बड़ी है दिक्कत

वेदांता की इन दिक्कतों से समझा जा सकता है कि नया सेमीकंडक्टर प्लांट्स सेटअप करना कितना मुश्किल है। इसमें भारी खर्च भी होता है और इसे चलाने के लिए खास एक्सपर्ट्स की भी जरूरत होती है। वहीं वेदांता मेटल और माइनिंग कंपनी है जबकि फॉक्सकॉन आईफोन असेंबल करती है यानी दोनों के पास ही सेमीकंडक्टर यानी चिप को लेकर विशेषज्ञता नहीं है। वहीं वित्तीय दबावों से जूझ रही वेदांता को सरकार से फंड की भी जरूरत है क्योंकि इस प्रोजेक्ट में भारी निवेश की जरूरत है।

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