Vedanta Resources : अरबपति अनिल अग्रवाल की कंपनी Vedanta के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। वेदांता रिसोर्सेज (Vedanta Resources) ने 80 करोड़ डॉलर का कर्ज चुका दिया है, जो कि लगभग 6,560 करोड़ रुपये के बराबर है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (Standard Chartered Bank) को यह कर्ज चुकाकर अपने गिरवी शेयर छुड़ा लिए है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस खबर के चलते सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को कंपनी के शेयरों में हलचल दिख सकती है। वेदांता लिमिटेड के शेयरों में शुक्रवार को 1.24 फीसदी की गिरावट देखी गई थी और इसका क्लोजिंग प्राइस 274.70 रुपये है।
कंपनी के शेयरों में दिख सकता है असर
कंपनी ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि लंदन स्थित फर्म ने तीन फैसिलिटीज का भुगतान किया है, जो लंदन और हांगकांग में स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक से ली गई थी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कदम का मकसद बढ़ती ब्याज दरों और उच्च कर्ज वाले कर्जदारों पर बढ़ते दबाव के बीच कंपनी की लिक्विडिटी की चिंताओं को दूर करना है। इस खबर का असर सोमवार को कंपनी के शेयरों में भी दिख सकता है।
वेदांता लिमिटेड ने कुछ समय पहले 20.5 रुपये प्रति शेयर के डिविडेंड की घोषणा की थी। यह पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी का 5वां अंतरिम डिविडेंड था। पिछले वित्तीय वर्ष में अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली कंपनी ने 81 रुपये के डिविडेंड का भुगतान किया।
अप्रैल में कंपनी ने कहा था कि उसने पिछले महीने सभी कर्ज और बांडों का भुगतान पहले ही कर दिया था, जिससे उसका ग्रॉस डेट 6.8 अरब डॉलर हो गया था। पिछले महीने एक इंटरव्यू में अनिल अग्रवाल ने कहा था कि वेदांता ग्रुप के पास अपने सभी कर्ज को चुकाने के लिए पर्याप्त कैश फ्लो है और इसका लक्ष्य 2-3 सालों में "नेट जीरो डेट कंपनी" बनना है।
शेयर गिरवी रखकर कर्ज लेती हैं कंपनियां
शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां आमतौर पर अपने शेयर गिरवी रखकर कर्ज लेती हैं। कंपनियों को अपने काम काज के लिए पैसों की लगातार जरूरत होती रहती है। हालांकि, जब कंपनी के शेयरों में गिरावट होती है तो गिरवी रखे शेयरों का मूल्य भी घटने लगता है। यह घटते हुए लिए गए कर्ज से नीचे चला जाता है। इससे बैंक को नुकसान होने का खतरा बन जाता है। ऐसे में कंपनी को या तो और शेयर गिरवी रखना पड़ता है या फिर उसे गिरवी शेयरों की संख्या घटाने की जरूरत होती है। इसके लिए उसे लोन का पूरा या फिर आंशिक भुगतान करना होता है।