अनिल अग्रवाल की Vedanta Resources को पैसे की जरूरत है। कंपनी करीब 3 अरब डॉलर के कर्ज (Bonds) को चुकाने के लिए और वक्त चाहती है। इस कर्ज की रीस्ट्रक्चरिंग के लिए वह इनवेस्टर्स से बात कर रही है। कंपनी को ये कर्ज 2024 और 2025 में चुकाने हैं। वेदांता ग्रुप ने अपनी कंपनियों की बेहतर वैल्यू हासिल करने के लिए बिजनेसेज को डीमर्ज करने का ऐलान किया है। लेकिन, इससे वेदांता को कर्ज देने वाले इनवेस्टर्स संतुष्ट नहीं हैं। वेदांता ग्रुप की कंपनियों के बॉन्ड्स की कीमतें लगातार गिर रही हैं। आखिर वेदांता ने इस मुश्किल से निकलने के लिए क्या प्लान बनाया है? यह सवाल न सिर्फ कंपनी के इनवेस्टर्स को परेशान कर रहा है बल्कि इस ग्रुप की कंपनियों के शेयरों के निवेशक भी इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं।
Vedanta Resources लंदन में लिस्टेड है। इस समूह की प्रमुख कंपनी Vedanta Ltd इंडिया में लिस्टेड है। वेदांता लिमिटेड ने पिछले हफ्ते अपने बिजनेसेज को छह लिस्टेड कंपनियों में बांटने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इनमें अल्युमीनियम, Oil and Gas, Power, Steel and ferrous, base metals और सेमीकंडक्टर्स जैसे नए बिजनेसेज के लिए एक इंकुबेटर शामिल हैं। इस रीस्ट्रक्चरिंग से इनवेस्टर्स को अपनी पसंद के बिजनेस में सीधे पैसे लगाने का मौका मिलेगा। वेदांता का मानना है कि इससे ग्रुप की कंपनियों की वैल्यूएशन बढ़ेगी।
वेदांता का यह भी मानना है कि बिजनेस स्ट्रक्चर आसान होने से अनिल अग्रवाल को कम प्रॉफिट और लॉस वाले बिजनेसेज को बेचने में मदद मिलेगी। अग्रवाल लंबे समय से अपने किसी बिजनेस को बेचने से बचते रहे हैं। वेदांता को मार्च 2025 में खत्म फाइनेंशियल ईयर में रीस्ट्रक्चरिंग का प्रोसेस पूरा हो जाने की उम्मीद है। इस कवायद का कितना फायदा इस ग्रुप को मिलेगा, इसके बारे में अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है।
कैसी है ग्रुप की वित्तीय स्थिति?
Vedanta Group को अगले दो साल में 3.2 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है। करीब 2 डॉलर का कर्ज अगले साल चुकाना है। इसका आधा हिस्सा अगले साल जनवरी में ही चुकाना है। 1.2 अरब डॉलर का कर्ज 2025 में चुकाना है। यह जानकारी ब्लूमबर्ग के डेटा पर आधारित है। कंपनी इस कर्ज का कुछ हिस्सा कैश में चुकाना चाहती है। बाकी पैसे के पेमेंट के लिए वह तीन साल का वक्त चाहती है। कंपनी के इस प्लान से इनवेस्टर्स खुश नहीं हैं। कंपनी पैसे जुटाने के लिए कुछ इनवेस्टर्स से भी बात कर रही है। इनमें Cerberus Capital Management जैसी कंपनियां शामिल हैं। वेदांता करीब 1 अरब डॉलर का प्राइवेट लोन इन कंपनियों से लेना चाहती है। लेकिन, वेदांता लिमिटेड को छह हिस्सों में बांटने के प्लान से यह मामला फंस गया है।
Moody's Investors Service और S&P Global Ratings पहले ही Vedanta Resources की रेटिंग घटा दी है। इसे जंक कैटेगरी में डाल दिया गया है। यह वेदांता ग्रुप की खराब वित्तीय सेहत का संकेत है। दोनों रेटिंग कंपनियों के वेदांता को डाउनग्रेड करने से इसके इनवेस्टर्स पर खराब असर पड़ने का अनुमान है। इससे उन्हें अपने पैसे वापस मिलने की चिंता सता सकती है।
अनिल अग्रवाल ने क्या कहा है?
Vedanta के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने 3 अक्टूबर को सीएनबीसी-टीवी18 से कहा था कि ग्रुप ने 2024 में मैच्योर होने वाले बॉन्ड्स के पैसे चुकाने के लिए तैयारी कर ली है। उन्होंने कहा था कि इस बारे में कंपनी जल्द ऐलान करेगी। उन्होंने कहा था कि स्थितियां अनुकूल रहने पर वेदांता नए कर्ज लेगी। लेकिन हम अपनी तरफ से भी इस कर्ज को चुकाने के लिए पैसे का इंतजाम कर रहे हैं।
स्टॉक मार्केट्स की कैसी प्रतिक्रिया है?
स्टॉक इनवेस्टर्स ने वेदांता के डीमर्जर प्लान का स्वागत किया है। लेकिन, कंपनी के डॉलर में जारी किए गए बॉन्ड्स की कीमतों में गिरावट आई है। कंपनी ने अलग-अलग चार बॉन्ड इश्यू से पैसे जुटाए थे। इनमें से तीन बॉन्ड्स की कीमतें 80 सेंट्स से नीचे आ गई हैं। कीमतों के इस लेवल को बहुत खराब माना जाता है।
वेदांता के बिजनेसेज को छह हिस्सों में बांटने से बॉन्ड्स के पैसे लौटाने में कंपनी को किसी तरह की मदद मिलती नहीं दिख रही है। वेदांता ग्रुप ने अब तक यह नहीं बताया है कि अलग होने वाली कंपनियों पर वह अपने कर्ज का बोझ किस तरह डालेगी। उसने यह भी नहीं बताया है अभी जिन शेयरों का इस्तेमाल कौलेटरल के रूप में किया जा रहा है, उनका क्या होगा। Vedanta Resources एक तरह से Vedanta Ltd और Hindustan Zinc Ltd में अपने हिस्से के करीब पूरे शेयर गिरवी रख चुकी है।