किसी भी देश की प्रगति ऊर्जा की उपलब्धता के साथ पूरी तरह से जुड़ी होती है। सरकार की बारहवीं पंचवर्षीय योजना के मुताबिक हर प्रकार की आर्थिक गतिविधियों के लिए बिजली की जरूरत होती है और ये तेज विकास के लिए महत्व है। भारत में ज्यादातर बिजली का निर्माण कोयले और प्राकृतिक (नैचुरल) गैस के जरिए किया जाता है। इसके उष्ण ऊर्जा (थर्मल पावर) कहा जाता है। हालांकि, पिछले कुछ वक्त से कोयले और प्राकृतिक गैस के भंडार में आई कमी की वजह से अक्षत ऊर्जा के स्रोतों की ओर रुख बढ़ रहा है। पानी की किल्लत की वजह से भी सरकार का रुझान अक्षत ऊर्जा स्रोतों की खोज की बढ़ा है।
