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पवन ऊर्जा: किफायती और पर्यावरण सुरक्षित

किसी भी देश की प्रगति ऊर्जा की उपलब्धता के साथ पूरी तरह से जुड़ी होती है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 02, 2022 पर 2:23 PM
पवन ऊर्जा: किफायती और पर्यावरण सुरक्षित

किसी भी देश की प्रगति ऊर्जा की उपलब्धता के साथ पूरी तरह से जुड़ी होती है। सरकार की बारहवीं पंचवर्षीय योजना के मुताबिक हर प्रकार की आर्थिक गतिविधियों के लिए बिजली की जरूरत होती है और ये तेज विकास के लिए महत्व है। भारत में ज्यादातर बिजली का निर्माण कोयले और प्राकृतिक (नैचुरल) गैस के जरिए किया जाता है। इसके उष्ण ऊर्जा (थर्मल पावर) कहा जाता है। हालांकि, पिछले कुछ वक्त से कोयले और प्राकृतिक गैस के भंडार में आई कमी की वजह से अक्षत ऊर्जा के स्रोतों की ओर रुख बढ़ रहा है। पानी की किल्लत की वजह से भी सरकार का रुझान अक्षत ऊर्जा स्रोतों की खोज की बढ़ा है।

कोल इंडिया का कहना है कि अगले 5 सालों में 20 फीसदी कोयले की कमी होगी, वहीं अर्न्स्ट एंड यंग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का प्राकृतिक गैस बाजार में किल्लत जारी है और वित्त वर्ष 2012 में प्राकृतिक गैस की 38 फीसदी मांग पूरी नहीं हो पाई थी। इसका मतलब है कि अगर भारत को बढ़ती आबादी और शहरीकरण की वजह से ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करना है तो देश को वायु जैसे अक्षत ऊर्जा के स्रोतों पर जोर देना होगा।

वायु ऊर्जा - आगे की राह

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक अक्टूबर 2013 में अक्षत ऊर्जा स्रोतों से कुल 29.53 गीगावॉट की बिजली का उत्पादन हुआ, जिसमें से 19.93 गीगावॉट वायु ऊर्जा रही, जो कुल अक्षत ऊर्जा का करीब 70 फीसदी है। जहां वायु ऊर्जा के निर्माण के मोर्चे पर अभी काफी काम बाकी है, फिर भी वैश्विक स्तर पर भारत ज्यादा पीछे नहीं है। सेंटर फॉर विंड टेक्नोलॉजी वेबसाइट के मुताबिक मौजूदा वायु ऊर्जा निर्माण के आधार पर दुनिया में भारत पांचवे स्थान पर है। सिर्फ अमेरिका, जर्मनी, चीन और स्पेन भारत से आगे हैं।

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