दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) की कंपनी वेदांता (Vedanta) ने अपने ऑयल और गैस फील्ड्स से सरकार को दिए जाने वाले प्रॉफिट में से करीब 9.1 करोड़ डॉलर रोक लिया है। कंपनी ने यह कदम 9 महीने पहले भारत सरकार की ओर से लगाए विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) का एक तरह से विरोध जताते हुए उठाया है। वेदांता की योजना इसी रकम से विंडफॉल टैक्स चुकाने की है। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने शुक्रवार 24 मार्च को सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। बता दें कि जब किसी बाहरी कारण के चलते किसी कंपनी या इंडस्ट्री के मुनाफे में अप्रत्याशित उछाल आता है, तो उस उछाल पर लगाए जाने वाले टैक्स को अप्रत्याशित कर या विंडफॉल टैक्स कहते हैं।
भारत सरकार ने 1 जुलाई 2022 को विंडफॉल टैक्स लगाया था। रूस-यूक्रेन के चलते पूरी दुनिया में अचानक से ऑयल और गैस के दाम काफी बढ़ गए थे। इसके चलते एनर्जी कंपनियों को खूब मुनाफा हुआ था। भारत सहित दुनिया के कई देशों ने इसी अप्रत्याशित मुनाफे पर टैक्स वसूलने के लिए एनर्जी कंपनियों पर विंडफॉल टैक्स लगाया था।
इसके अलावा सरकार ने देश में निकाले जाने वाले क्रूड ऑयल पर भी स्पेशल एडिशनल एक्साइड ड्यूटी (SAED) लगाया। हालांकि कंपनियां इसे वित्तीय स्थिरता मुहैया कराने वाले कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन मानती हैं।
SAED शुरू में 23,250 रुपये प्रति टन (40 डॉलर प्रति बैरल) की दर से लगाया गया। हर 15 दिन के बाद इस दर की समीक्षा की जाती है। फिलहाल इसे घटाकर 3,500 रुपये प्रति टन कर दिया गया है। यह ऑयस एंड गैस की कीमत पर लगने वाले 10-20% रॉयल्टी और 20% के ऑयल सेस के अतिरिक्त है।
वेदांता ने 31 जनवरी को और 20 फरवरी को ऑयल एंड गैस मिनिस्ट्री को बताया था कि उसने SAED चुकाने के लिए राजस्थान ब्लॉक, आरजे-ओएन-90/1 पर 8.53 करोड़ डॉलर के अलावा कैम्बे बेसिन में ब्लॉक सीबी-ओएस/2 के लिए 55 लाख डॉलर की कटौती की है। कंपनी ने कहा कि यह कदम कॉन्ट्रैक्ट में शामिल आर्थिक लाभ को बरकरार रखने के नजरिए के साथ उठाया गया है।
मिनिस्ट्री ने हालांकि 22 फरवरी को एक पत्र में इसे ‘एकतरफा’ कटौती बताते हुए इसे गलत बताया और कंपनी को 7 दिनों के भीतर ब्याज के साथ भुगतान करने के लिए कहा। हालांकि वेदांता ने इस निर्देश का पालन नहीं किया है। खबर लिखे जाने तक इस मामले में पेट्रोलियम मिनिस्ट्री और वेदांता की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था।