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Wipro ने अपने 450 फ्रेशर्स कर्मचारियों को इसलिए नौकरी से निकाला, ट्रेनिंग पर खर्च 75,000 रुपया किया माफ

Wipro Layoff: देश की शीर्ष आईटी कंपनियों में से एक विप्रो (Wipro) ने अपने सैंकड़ों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। निकाले गए सभी कर्मचारी फ्रेशर्स थे और इन्हें इंटरनल टेस्ट में खराब प्रदर्शन के बाद निकाला गया है। विप्रो ने बताया, "हमें 452 फ्रेशर्स को नौकरी से निकालना पड़ा क्योंकि उन्होंने ट्रेनिंग के बाद भी बार-बार टेस्ट में खराब प्रदर्शन किया।"

Moneycontrol Newsअपडेटेड Jan 20, 2023 पर 11:07 PM
Wipro ने अपने 450 फ्रेशर्स कर्मचारियों को इसलिए नौकरी से निकाला, ट्रेनिंग पर खर्च 75,000 रुपया किया माफ
Wipro के शेयर शुक्रवार 20 जनवरी को बीएसई पर 0.05% गिरकर 403.15 रुपये के भाव पर बंद हुए

Wipro Layoff: देश की शीर्ष आईटी कंपनियों में से एक विप्रो (Wipro) ने अपने सैंकड़ों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक निकाले गए सभी कर्मचारी फ्रेशर्स थे और इन्हें इंटरनल टेस्ट में खराब प्रदर्शन के बाद निकाला गया है। विप्रो ने मीडिया पोर्टलों के सवालों के जवाब में बताया, "हमें 452 फ्रेशर्स को नौकरी से निकालना पड़ा क्योंकि उन्होंने ट्रेनिंग के बाद भी बार-बार टेस्ट में खराब प्रदर्शन किया।" निकाले गए सभी कर्मचारियों को उनका टर्मिनेशन लेटर मिल गया है। लेटर में कहा गया है कि कंपनी ने सभी एंप्लॉययी के ट्रेनिंग पर 75,000 रुपये खर्च किए हैं जो शर्तों के मुताबिक टेस्ट में फेल होने के बाद उन्हें चुकाने हैं, लेकिन कंपनी ने इस रकम को माफ कर दिया है।

कंपनी ने जारी एक बयान में कहा, "विप्रो में हमने खुद के लिए उच्चतम मानक बनाए हैं, जिन पर हम गर्व महसूस करते हैं। अपने लिए निर्धारित इन मानकों के अनुरुप, हम कंपनी में आने वाले सभी नए कर्मचारी से यह उम्मीद करते हैं वह निर्धारित कार्य के एरिया में एक निश्चित दक्षता हासिल करे। इसके लिए हम उन्हें ट्रेनिंग भी देते हैं।"

विप्रो ने आगे कहा, "इसके बाद कर्मचारियों को एक मूल्यांकन प्रक्रिया से गुजरना होता है, जिसमें संगठन के उद्देश्यों और हमारे क्लाइंट्स की जरूरतों को ध्यान में असेसमेंट होता है। परफॉर्मेंस मूल्याकांन के इस व्यवस्थित प्रक्रिया के बाद कई कदम उठाए जाते हैं। इसमें मेंटर मुहैया कराना और रिट्रेनिंग आदि शामिल हैं। कई बार कुछ कर्मचारियों को कंपनियों से जाने देने का कड़ा फैसला भी लेना पड़ता है।"

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