Yes Bank Share Price: Yes Bank ने Dish TV के साथ चल रही लड़ाई में अब बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसने कोर्ट से स्पेशल शेयरहोल्डिंग मीटिंग बुलाने के लिए डिश टीवी को आदेश जारी करने की मांग की है। कोर्ट ने सोमवार (19 सितंबर) को यस बैंक की यह याचिका मंजूर कर ली। उधर, डिश टीवी के चेयरमैन जवाहर गोयल ने सोमवार (19 सितंबर) को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से इस्तीफा दे दिया।
यस बैंक की डिश टीवी में सबसे ज्यादा 24.78 फीसदी हिस्सेदारी है। दोनों के बीच एक साल से ज्यादा समय से लड़ाई चल रही है। बॉम्बे हाईकोर्ट यस बैंक की याचिका पर मंगलवार (20 सितंबर) को सुनवाई करेगा। इससे पहले यस बैंक ने पिछले साल नवंबर में NCLT की मुंबई बेंच का दरवाजा खटखटाया था। उसने बेंच से डिश टीवी को एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाने के लिए आदेश देने की मांग की थी।
लेकिन, एनसीएलटी की मुंबई बेंच ने इस मामले में मार्च तक कोई फैसला नहीं दिया। इसकी वजह यह है कि ऐसा ही एक मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में था। यह मामला जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज और Invesco के बीच था। इस साल मार्च में बॉम्बे हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने इस मामले में इनवेस्को के पक्ष में फैसला सुनाया था। उसने कहा था कि 10 फीसदी शेयरहोल्डर्स EGM की मांग कर सकते हैं। उसने कहा था कि बोर्ड को यह मांग पूरी करनी चाहिए।
इधर, यस बैंक पिछले पांच महीने से डिश टीवी की EGM के लिए एनसीएलटी से फैसला आने का इंतजार कर रहा था। लेकिन, NCLT यस बैंक की याचिका पर सुनवाई नहीं कर सका। इसलिए अब यस बैंक ने डिश टीवी की EGM के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस बीच, 19 सितंबर को डिश टीवी के चेयरमैन जवाहर गोयल के बोर्ड से इस्तीफा दे देने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है।
इस साल जून में डिश टीवी के 50 फीसदी से ज्यादा शेयरहोल्डर्स ने गोयल को दोबारा कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। अब डिश टीवी के बोर्ड में चार इंडिपेंडेंट डायेक्टर्स बच गए हैं। इनमें भगवान दास नारंग, शंकर अग्रवाल, रश्मी अग्रवाल और राकेश मोहन शामिल है।
नारंग का कार्यकाल 26 सितंबर को खत्म होने जा रहा है। इसी तारीख को डिश टीवी की एनुअल जनरल मीटिंग होने वाली है। उधर, मोहन की नियुक्ति के लिए 29 अक्टूबर से पहले शेयरहोल्डर्स की मंजूरी जरूरी है। मोहन की नियुक्ति इस साल जुलाई में हुई थी। नए नियमों के मुताबिक, डायरेक्ट्स की नियुक्ति के तीन महीने के अंदर शेयरहोल्डर्स का एप्रूवल जरूरी है।